वीर सावरकर के संघर्ष को दर्शाने वाली प्रमुख फिल्में: पुण्यतिथि पर विशेष
सारांश
Key Takeaways
- वीर सावरकर का योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण है।
- सावरकर की पुण्यतिथि पर उनकी फिल्मों का महत्व बढ़ जाता है।
- फिल्में उनके विचारों और संघर्ष को जीवंत बनाती हैं।
- भाषाई विविधता में सावरकर पर फिल्में बनी हैं।
- फिल्मों के माध्यम से सावरकर की कहानी को समझा जा सकता है।
मुंबई, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। जब भी हम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारियों की बात करते हैं, विनायक दामोदर सावरकर का नाम गर्व से लिया जाता है। उनके पुण्यतिथि के अवसर पर हम उन फिल्मों पर चर्चा करेंगे जो उनके संघर्ष को दर्शाती हैं। ये फिल्में भले ही कम चर्चा में आई हों, लेकिन इनकी सत्य कहानी ने दर्शकों का दिल जरूर जीता है।
वीर सावरकर पर कई फिल्में बनी हैं, जिनमें हिंदी से लेकर मराठी भाषा तक का समावेश है। सबसे पहले बात करते हैं रणदीप हुड्डा की फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' की, जिसे बनाने के लिए अभिनेता ने अपना घर तक बेच दिया। फिल्म में उन्होंने सावरकर का किरदार निभाया है, जिसमें उन्होंने जान डाल दी। हालांकि, फिल्म का कलेक्शन औसत रहा और इसे कई विरोधों का सामना भी करना पड़ा।
प्रियदर्शन की 'कालापानी' उन प्रारंभिक फिल्मों में से एक है, जिसमें वीर सावरकर का नाम लिया गया। यह फिल्म उन स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी है, जिन्हें ब्रिटिश राज ने अंडमान और निकोबार में कैद किया था। अनु कपूर ने फिल्म में सावरकर की भूमिका निभाई। 1996 में आई 'कालापानी' को मलयालम की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है।
साल 2001 में रिलीज हुई 'वीर सावरकर' भी एक महत्वपूर्ण फिल्म थी। इसके बाद फिल्म का गुजराती संस्करण भी जारी किया गया था। यह फिल्म सावरकर की पहली जीवनी थी, जिसे संगीतकार सुधीर फडके ने सावरकर दर्शन प्रतिष्ठान के तहत बनाया था। फिल्म का निर्देशन वेद राही ने किया था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म बनाने के लिए चंदा इकट्ठा किया गया था और लोगों को सावरकर के कार्यों के प्रति जागरूक किया गया था।
2015 में आई 'व्हाट अबाउट सावरकर?' को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह फिल्म सावरकर पर आधारित नहीं है, लेकिन उनसे जुड़ी हुई है। मराठी में बनी यह फिल्म अभिमान मराठे की कहानी को दर्शाती है, जो सावरकर का अपमान करने वाले एक भ्रष्ट मंत्री के खिलाफ आवाज उठाता है। यह फिल्म सावरकर को सम्मान दिलाने की लड़ाई को दर्शाती है।