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गुजरात में प्राकृतिक खेती का नया अध्याय, राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया प्रदर्शनी का उद्घाटन

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गुजरात में प्राकृतिक खेती का नया अध्याय, राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया प्रदर्शनी का उद्घाटन

सारांश

गुजरात विधानसभा में प्राकृतिक खेती उत्पादों की प्रदर्शनी का उद्घाटन राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा किया गया। यह प्रदर्शनी किसानों को रसायन-मुक्त खेती के प्रति जागरूक करने और प्राकृतिक कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने का प्रयास है।

मुख्य बातें

प्रदर्शनी का उद्घाटन राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का मुख्य उद्देश्य है।
किसानों को रसायन-मुक्त खेती के लाभ बताए गए।
किसानों में खुशी और उपजाऊता में वृद्धि हो रही है।
बड़ी संख्या में कृषि संस्थानों ने भाग लिया।

गांधीनगर, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शुक्रवार को गुजरात विधानसभा परिसर में प्राकृतिक खेती के उत्पादों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य किसानों और आम जनता को रसायन-मुक्त खेती के महत्व के प्रति जागरूक करना और प्राकृतिक कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना है।

विधानसभा परिसर में प्राकृतिक खेती से उत्पादित कुल नौ स्टॉल लगाए गए, जहाँ यह प्रदर्शित किया गया कि बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के भी उच्च गुणवत्ता वाली फसल उगाई जा सकती है।

उद्घाटन के बाद, राज्यपाल और अन्य अतिथियों ने स्टॉल का अवलोकन किया और प्रगतिशील किसानों से चर्चा की। प्रदर्शनी में कामधेनु नेचुरल, प्राकृतिक कृषि फार्म, अडेसर एरिया फार्म प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, रामिबा और रामाबा प्राकृतिक खेती फार्म, नीर नेचुरल फार्म और प्रतेनमा नेचुरल फार्म जैसी कई इकाइयों ने भाग लिया।

गुजरात के बनासकांठा जिले के सरदारकृषिनगर में स्थित सरदारकृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय और जूनागढ़ में स्थित जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय समेत अन्य कृषि संस्थानों ने भी अपने उत्पाद और नवाचार प्रदर्शित किए।

गुजरात विधानसभा स्पीकर शंकर चौधरी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "जहर-मुक्त खेती, यानी प्राकृतिक खेती, अमृत की तरह है।" उन्होंने बताया कि विश्व में एक बड़ी समस्या यह है कि खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग उपज की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। आने वाली पीढ़ियों को बचाने के लिए, हमारे लिए प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना अत्यंत आवश्यक है।

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा, "मैं सबसे पहले विधानसभा के स्पीकर शंकर चौधरी का धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उन्होंने प्राकृतिक खेती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को वह महत्व दिया है जिसके वे वास्तव में हकदार हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि किसान आज प्राकृतिक खेती से 5 से 7 लाख रुपए की बचत कर रहे हैं, जिससे धरती की उपजाऊता भी बढ़ रही है और किसानों में खुशी भी है। जहां इस तरह की खेती होती है, वहाँ का कार्बन स्तर 1% से बढ़कर 2.5 से 3% हो गया है। पानी और खर्च की बचत हो रही है और साथ ही उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है।

इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को राज्य स्तर पर मंच प्रदान करना और उनके प्रयासों को मान्यता दिलाना है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत लंबे समय से प्राकृतिक खेती और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में लगे हैं। वे किसानों को स्थायी खेती अपनाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और लागत कम करने के लिए प्रेरित करते रहे हैं।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी, उपाध्यक्ष पूर्णेश मोदी, कृषि मंत्री जीतू वाघाणी और संसदीय कार्य मंत्री ऋषिकेश पटेल भी उपस्थित रहे। राज्य भाजपा अध्यक्ष और विधायक जगदीश विश्वकर्मा ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कृषि में नवाचारों को भी प्रदर्शित करती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य किसानों और आम नागरिकों को रसायन-मुक्त खेती के प्रति जागरूक करना और प्राकृतिक कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना है।
कितने स्टॉल प्रदर्शनी में शामिल हैं?
प्रदर्शनी में कुल नौ स्टॉल लगाए गए हैं।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसका धन्यवाद किया?
राज्यपाल ने विधानसभा के स्पीकर शंकर चौधरी का धन्यवाद किया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती को महत्व दिया।
प्राकृतिक खेती से किसानों को क्या लाभ हो रहा है?
किसान प्राकृतिक खेती से 5 से 7 लाख रुपए की बचत कर रहे हैं, जिससे उनकी खुशी बढ़ रही है।
इस प्रदर्शनी में कौन-कौन से कृषि संस्थान शामिल हैं?
प्रदर्शनी में कामधेनु नेचुरल, अडेसर एरिया फार्म प्रोड्यूसर कंपनी, और अन्य कृषि संस्थान शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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