रूसी तेल छूट पर डॉ. वाइल अव्वाद: अमेरिका का स्वार्थ उजागर, भारत को चाहिए स्वतंत्र ऊर्जा नीति
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिमी एशिया के रणनीतिकार डॉ. वाइल अव्वाद ने 17 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में रूसी तेल खरीद पर अमेरिका द्वारा दी गई छूट को लेकर स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह अमेरिकी राष्ट्रीय हितों की देन है, और भारत को इसे स्थायी राहत मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार, भारत के लिए यही उचित है कि वह अपनी ऊर्जा एवं विदेश नीति के फैसले दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण से ले।
अमेरिकी छूट का असली मकसद
डॉ. अव्वाद ने कहा कि उनकी स्पष्ट राय है कि यह फैसला अमेरिका ने अपने हितों को ध्यान में रखकर लिया है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका हमेशा अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति को प्राथमिकता देता है।' उनके अनुसार, आज की छूट कल के प्रतिबंध की भूमिका भी हो सकती है, क्योंकि वाशिंगटन अपने भू-राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों के अनुसार नीतियाँ बदलता रहता है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुज़र रहा है। अमेरिकी प्रतिबंध नीतियों में बार-बार बदलाव ने कई देशों को दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते करने में झिझकने पर मजबूर किया है।
भारत और चीन को अल्पकालिक राहत
डॉ. अव्वाद ने स्वीकार किया कि यह छूट भारत के लिए एक बड़ी राहत अवश्य है। इससे भारत को रूसी तेल खरीद में अधिक लचीलापन मिलेगा और चीन को भी इसका लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इससे घरेलू बाजार में तेल की लागत पर दबाव कम हो सकता है, जिससे डीजल और पेट्रोल की कीमतों में आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की संभावना है।
गौरतलब है कि भारत पिछले कुछ वर्षों में रूस का सबसे बड़े तेल खरीदारों में से एक बन चुका है। 2022 के बाद से भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जो रियायती दरों पर उपलब्ध था।
स्थायी नीति की आवश्यकता
डॉ. अव्वाद ने चेताया कि तेल खरीद एक दीर्घकालिक व्यापारिक और रणनीतिक निर्णय है। यदि कोई देश बार-बार खरीद शुरू करे और फिर अमेरिकी दबाव में पीछे हट जाए, तो निकटतम साझेदार भी भविष्य में शर्तें कड़ी कर सकता है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका आज छूट दे सकता है, लेकिन कल फिर प्रतिबंध या टैरिफ लागू कर सकता है।'
इसलिए, उनके अनुसार, भारत को अल्पकालिक राहत के मोह में फँसने की बजाय ऊर्जा सुरक्षा की दीर्घकालिक रूपरेखा तैयार करनी चाहिए।
भारत के लिए स्वायत्त फैसलों का वक्त
डॉ. अव्वाद का मानना है कि अब वह समय आ गया है जब भारत को रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर स्वतंत्र और स्वायत्त निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत की ऊर्जा एवं विदेश नीति के फैसले राष्ट्रीय हितों पर आधारित होने चाहिए, न कि किसी बाहरी शक्ति के क्षणिक समीकरणों पर।
आलोचकों का भी कहना है कि भारत की ऊर्जा निर्भरता को विविध स्रोतों में संतुलित करना समय की माँग है, ताकि किसी एकल भू-राजनीतिक उथल-पुथल का घरेलू अर्थव्यवस्था पर गहरा असर न पड़े। आने वाले महीनों में भारत सरकार की ऊर्जा नीति का रुख यह तय करेगा कि वह इस क्षणिक राहत को रणनीतिक लाभ में बदल पाती है या नहीं।