क्या सैयदा हमीद के 'बांग्लादेशी प्रेम' पर भाजपा का हमला उचित है?

सारांश
Key Takeaways
- सैयदा हमीद का बांग्लादेशी प्रवासियों के अधिकारों पर बयान
- भाजपा की प्रतिक्रिया और सवाल
- मानवता और सांस्कृतिक एकता की रक्षा का आग्रह
गुवाहाटी, २४ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। गुवाहाटी में कांग्रेस शासन के दौरान योजना आयोग की पूर्व सदस्य सैयदा सैयदैन हमीद के हालिया बयान ने राजनीतिक विमर्श में उथल-पुथल मचा दी है। वे एक लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर जानी जाती हैं, जो असम में संभावित आप्रवासी मुद्दों पर अपने विचार साझा करती हैं।
उन्होंने यह सवाल उठाया कि अगर कोई बांग्लादेशी है, तो इसमें क्या गलत है? वे भी इंसान हैं और इस विशाल धरती पर रहने का हक रखते हैं। इससे किसी के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता।
उन्होंने यह भी कहा, "यह कहना कि अवैध प्रवासी देश के नागरिकों के अधिकार छीन रहे हैं, यह एक दुखद, दुर्भावनापूर्ण और मानवता के खिलाफ विचार है।" उनका मानना है कि यदि कोई इंसान पृथ्वी पर मौजूद है, तो उसे बेदखल करना मुसलमानों पर गंभीर अपराध के समान है।
उन्होंने 'गंगा-जमुनी तहजीब' और भारत की 'समग्र संस्कृति' को बनाए रखने की अपील की, और सभी को इस सांस्कृतिक एकता की रक्षा के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।
इस बीच, असम भाजपा ने उनके बयान पर कड़ा विरोध जताया। पार्टी के नेता पिजुष हजारिका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर हमीद का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि यदि वे प्रवासियों के अधिकारों के लिए इतनी चिंतित हैं, तो क्यों वे इन्हें अपने घर में स्थान नहीं देतीं? उन्होंने कहा, "यदि उन्हें इतनी चिंता है, तो उन्हें और उनके समर्थकों को इसका बोझ साझा करना चाहिए।"
असम भाजपा ने उनके वीडियो को शेयर करते हुए 'एक्स' पर लिखा, "ये हैं सैयदा हमीद, जो कांग्रेस के शासन में योजना आयोग की पूर्व सदस्य रहीं। इनकी हिम्मत देखिए, यदि उन्हें असम में अवैध बांग्लादेशियों के अधिकारों की इतनी चिंता है, तो वे उन्हें अपने घर में क्यों नहीं रखतीं? शायद उनके जैसे विचार रखने वाले लोग भी इस बोझ को उठा सकें।"