क्या भारतीय संविधान लोगों की उम्मीदों को जाहिर करने में एक प्रभावशाली ढांचा है?: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

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क्या भारतीय संविधान लोगों की उम्मीदों को जाहिर करने में एक प्रभावशाली ढांचा है?: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारतीय संविधान आज भी लोगों की उम्मीदों का प्रतीक है। उन्होंने सांसदों की मेहनत की सराहना की और संविधान के आदर्शों पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे, जो संविधान के महत्व को स्वीकारते हैं।

Key Takeaways

  • संविधान ने व्यक्तिगत और सामूहिक गरिमा को मजबूत किया है।
  • सांसदों ने जनता की आवाज को संसद में प्रभावी ढंग से पहुंचाया है।
  • संविधान 21वीं सदी में लोगों की उम्मीदों को व्यक्त करने का एक ढांचा है।
  • भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में प्रगति हो रही है।
  • संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है।

नई दिल्ली, 26 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि संविधान को अपनाने के समय जो तर्क प्रस्तुत किए गए थे, वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। संविधान के निर्माण का उद्देश्य हमारे सामूहिक और व्यक्तिगत गरिमा और आत्म-सम्मान को मजबूत करना था। उन्होंने गर्व से कहा कि हमारे सांसदों और संसद ने पिछले दशकों में जनता की आवाज को प्रभावी तरीके से संसद में पहुंचाया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह बात संसद के संविधान सदन में आयोजित 75वें संविधान दिवस समारोह में कही। उन्होंने उल्लेख किया कि 21वीं सदी में हमारा संविधान लोगों की उम्मीदों को व्यक्त करने के लिए एक बहुत असरदार ढांचा प्रदान करता है। उन्होंने सभी को संविधान दिवस की बधाई दी।

उन्होंने संविधान निर्माताओं की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सांसदों की मेहनत की प्रशंसा की। राष्ट्रपति ने बताया कि संविधान के आदर्श सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित हैं। हमारे संसद सदस्य इन आदर्शों को व्यवहार में लाने का कार्य कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और इसका श्रेय हमारी संस्कृति, संविधान और लोकतंत्र की मजबूत नींव को जाता है। उन्होंने सभी सांसदों और नेताओं की भूमिका की सराहना की, जिन्होंने संविधान के आदर्शों को बनाए रखने में योगदान दिया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि 26 नवंबर 1949 को आजाद भारत की संविधान सभा ने हमारे पवित्र संविधान को अपनाया था। उन्होंने सभी भारतवासियों को संविधान दिवस की शुभकामनाएं दी और बताया कि 2015 से इसे हर साल मनाया जाता है।

उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, के.एम. मुंशी और संविधान सभा के अन्य सदस्यों को याद किया और कहा कि संविधान हर पृष्ठ पर हमारे देश की आत्मा को प्रदर्शित करता है। संविधान का प्रारूप भारत माता के महान नेताओं ने संविधान सभा में तैयार किया। यह लाखों देशवासियों की समझ, त्याग और सपनों का परिणाम है।

सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि महान विद्वानों और संविधान सभा के सदस्यों ने करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए गंभीरता से कार्य किया। उनके निस्वार्थ योगदान ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना दिया। उन्होंने संविधान को समझ, अनुभव, त्याग और उम्मीदों से भरा बताया और कहा कि इसकी आत्मा ने यह साबित किया कि भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।

वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी संविधान सभा के सदस्यों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनकी दूरदर्शिता, मेहनत और समझदारी का परिणाम इतना शानदार संविधान है, जो हर नागरिक को न्याय, बराबरी और सम्मान प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि संविधान सभा का यह केंद्रीय कक्ष वह पवित्र स्थान है, जहां गहरी चर्चा और चिंतन के बाद संविधान का निर्माण हुआ।

ओम बिरला ने कहा कि संविधान के मार्गदर्शन में पिछले सात दशकों में भारत ने सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और अच्छे शासन के लिए नीतियां बनाई हैं। संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है ताकि संविधान में निहित स्वतंत्रता, बराबरी, भाईचारा और न्याय के सिद्धांतों का सम्मान किया जा सके।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कई अन्य नेता भी उपस्थित थे।

Point of View

NationPress
30/11/2025

Frequently Asked Questions

संविधान दिवस कब मनाया जाता है?
संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि संविधान आज भी लोगों की उम्मीदों का प्रतीक है और यह एक प्रभावशाली ढांचा है।
संविधान के आदर्श क्या हैं?
संविधान के आदर्श सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित हैं।
इस वर्ष संविधान दिवस पर कौन-कौन उपस्थित थे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, और अन्य कई प्रमुख नेता उपस्थित थे।
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