क्या संघ प्रमुख मोहन भागवत सच में देश के लिए काम करते हैं?
सारांश
Key Takeaways
- संघ प्रमुख मोहन भागवत देश के उत्थान के लिए कार्यरत हैं।
- शिवसेना नेता शाइना एनसी ने विपक्ष की बयानबाजी को खारिज किया।
- बीसीसीआई को जनता की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए।
- महायुति को जनता का समर्थन मिल रहा है।
- 68 उम्मीदवार बिना विरोध के जीते हैं।
मुंबई, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना की नेता शाइना एनसी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत पर विपक्षी नेताओं की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि संघ प्रमुख हमेशा देश के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संघ के खिलाफ अनावश्यक बयान देने वाले नेताओं को समझदारी से विचार करना चाहिए।
वास्तव में, विपक्षी नेता संघ प्रमुख के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा और संघ को एक ही नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि मोहन भागवत केवल राष्ट्र के विकास के लिए कार्यरत हैं और हमें गर्व है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पिछले सौ वर्षों में देशभर में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों का वातावरण तैयार किया है। जो लोग असहमत हैं, वे बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, लेकिन उनकी राय से विजन नहीं बदलता। हम अपने सरसंघचालक के बताए हिंदू राष्ट्र के विचार का समर्थन करते हैं और भविष्य में भी उनके विचारों को आगे बढ़ाते रहेंगे।
बीसीसीआई द्वारा बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को केकेआर टीम से हटाने के निर्देश पर शाइना एनसी ने कहा कि क्रिकेट भारत में एक जुनून है और यह देश को एकजुट करता है। किसी भी राष्ट्रीय लीग के संदर्भ में निर्णय लेते समय आम जनता की भावनाओं को ध्यान में रखना चाहिए। बीसीसीआई, जो क्रिकेट की सबसे बड़ी संस्था है, को मौजूदा हालात और जनता की चिंताओं को ध्यान में रखना चाहिए। हालांकि, खेल को सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए, लेकिन इसे जमीनी हकीकत से अलग नहीं किया जा सकता।
बीएमसी चुनाव के संदर्भ में शिवसेना नेता ने कहा कि महायुति को जनता से समर्थन प्राप्त हो रहा है। हमें उम्मीद है कि महायुति का ही महापौर बनेगा।
उन्होंने बताया कि 68 उम्मीदवार बिना किसी विरोध के जीत गए, जो गठबंधन पर जनता के भरोसे और एक स्थिर सरकार तथा प्रगतिशील काम की उनकी इच्छा को दर्शाता है। एक तरफ वे लोग हैं जिन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर, नागरिक सुविधाओं और जमीनी स्तर पर प्रशासन में पारदर्शिता से काम किया है। दूसरी तरफ विपक्ष के बेबुनियाद आरोप हैं जो लोकतंत्र को मजबूत नहीं करते, बल्कि संविधानिक जीत और हार पर सवाल उठाते हैं।