संसद में बढ़ते तनाव और ईंधन कीमतों पर विपक्ष ने चर्चा की मांग की

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संसद में बढ़ते तनाव और ईंधन कीमतों पर विपक्ष ने चर्चा की मांग की

सारांश

नई दिल्ली में संसद में विपक्ष ने मध्य पूर्व के तनाव और ईंधन की बढ़ती कीमतों पर चर्चा की मांग की है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को अर्थव्यवस्था और आम जनता से जोड़ा है, जिससे संसद में गंभीर बहस की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

Key Takeaways

  • विपक्ष ने संसद में ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा की मांग की।
  • ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
  • कांग्रेस ने स्थगन प्रस्ताव पेश किया है।
  • अखिलेश यादव ने विदेश नीति पर सवाल उठाए।
  • संसद में गंभीर बहस की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संसद में सोमवार को मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन की कीमतों में हो रही वृद्धि पर विपक्ष ने सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग की है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को सीधे देश के आम लोगों और भारत की अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए संसद में गंभीर बहस को आवश्यक बताया है।

कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, "मौजूदा हालात की गंभीरता और पूरे क्षेत्र पर इसके प्रभाव को देखते हुए इस विषय पर संसद में चर्चा होना अत्यंत आवश्यक है।" उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया है, जिससे सदन में तात्कालिक चर्चा हो सके। पार्टी ने लोकसभा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी पेश किया है, लेकिन वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा आम जनता पर पड़ने वाला प्रभाव है।

वेणुगोपाल ने कहा कि ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं और खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय नागरिक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, जबकि सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि संसद का मुख्य उद्देश्य ही देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना है। यदि संसद में ऐसे मामलों पर चर्चा नहीं होगी, तो संसद की प्रासंगिकता का क्या होगा।

थरूर ने आगे कहा, "मध्य पूर्व में तनाव के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट उत्पन्न हो रहा है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है और कतर से गैस की आपूर्ति भी फिलहाल बंद हो गई है, क्योंकि वहां 'फोर्स मेज्योर' घोषित किया गया है। हमारी फैक्ट्रियों में भारत के लिए गैस की आपूर्ति नहीं हो रही है। हम कुछ सप्लाई लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन निश्चित रूप से हम चिंतित हैं।"

उन्होंने कहा कि कीमतों में वृद्धि हो रही है, एलपीजी की कीमतों में 60 रुपए की बढ़ोतरी हुई है और पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ने वाली हैं। इस प्रकार, यह सब हमारे देश के लिए एक गंभीर समस्या बन सकता है, इसलिए सरकार को एक जिम्मेदार और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। वेनुगोपाल ने कहा कि सांसदों का यही उद्देश्य होना चाहिए कि हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण और आम लोगों पर प्रभाव डालने वाले सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।

वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने भी सरकार से विदेश नीति और तेल खरीद नीति पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि अमेरिका यह तय कर रहा है कि भारत किस देश से तेल खरीदे। यादव ने कहा कि भारत की विदेश नीति और इस संकट को सरकार किस प्रकार संभाल रही है, इस पर संसद में खुलकर बहस होनी चाहिए।

Point of View

बल्कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहे हैं। एक जिम्मेदार सरकार को इन चिंताओं का समाधान करना चाहिए।
NationPress
10/03/2026

Frequently Asked Questions

संसद में किस मुद्दे पर चर्चा की गई?
संसद में मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव और ईंधन की कीमतों पर चर्चा की गई।
कौन से विपक्षी दलों ने चर्चा की मांग की?
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने चर्चा की मांग की।
क्यों ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं?
मध्य पूर्व में तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।
क्या सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी?
अभी तक सरकार की ओर से कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इस मुद्दे का आम जनता पर क्या असर पड़ रहा है?
ईंधन की बढ़ती कीमतें आम जनता के जीवन स्तर और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं।
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