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क्या उज्जैन में संसदीय राजभाषा समिति के सदस्यों ने महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन किए?

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क्या उज्जैन में संसदीय राजभाषा समिति के सदस्यों ने महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन किए?

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में संसदीय राजभाषा समिति ने भस्म आरती में भाग लिया। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत को भी उजागर करता है। जानिए इस महत्वपूर्ण यात्रा के बारे में।

मुख्य बातें

संसदीय राजभाषा समिति ने महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में भाग लिया।
भगवान महाकालेश्वर के दर्शन करने का अवसर मिला।
समिति ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रचार के लिए कार्य किया।
मंदिर प्रबंध समिति ने सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं।
यह आयोजन उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत को उजागर करता है।

उज्जैन, १५ अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार सुबह संसदीय राजभाषा समिति (तीसरी उपसमिति) के सदस्यों ने भगवान महाकालेश्वर की पवित्र भस्म आरती में भाग लिया। समिति के संयोजक और लोकसभा सांसद श्रीरंग आप्पा बारणे के नेतृत्व में सांसदों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने देश की समृद्धि और कल्याण की कामना की।

प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा सांसद ओमप्रकाश राजेनिंबालकर, राज्यसभा सांसद ईरण्णा कड़ाड़ी, नीरज डांगी, और संगीता यादव सहित अन्य सदस्य शामिल थे। ये सभी उज्जैन में प्रशासनिक कार्यों के सिलसिले में आए थे। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उप प्रशासक एस.एन. सोनी ने सभी अतिथियों का विधिवत स्वागत किया और उनका सम्मान किया।

भस्म आरती, जो महाकालेश्वर मंदिर की एक विशेष पूजा है, सुबह के समय होती है और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। समिति के सदस्यों ने इस पवित्र अनुष्ठान में भाग लेकर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया। मंदिर प्रबंध समिति ने सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं ताकि दर्शन और पूजा सुचारू रूप से हो सके। मंदिर समिति की ओर से हर प्रकार के बंदोबस्त किए गए थे ताकि दर्शन के लिए आने वाले किसी भी श्रद्धालु को कोई दिक्कत नहीं हो।

संसदीय राजभाषा समिति का यह दौरा उज्जैन के लिए महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि यह समिति हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है। सदस्यों ने मंदिर के दर्शन के साथ-साथ अपने प्रशासनिक दायित्वों को भी पूरा किया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई और समिति के सदस्यों ने मंदिर की व्यवस्था और प्रबंधन की सराहना की।

यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि इसने उज्जैन की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया। मंदिर प्रबंध समिति ने इस दौरे को यादगार बनाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए एक सकारात्मक कदम है। समिति के सदस्यों ने मंदिर के दर्शन के साथ-साथ अपने प्रशासनिक दायित्वों को भी पूरा किया, जो हमारे देश की विविधता और एकता को दर्शाता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संसदीय राजभाषा समिति का उद्देश्य क्या है?
संसदीय राजभाषा समिति का उद्देश्य हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है।
भस्म आरती का महत्व क्या है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर की एक विशेष पूजा है, जिसमें श्रद्धालु भगवान के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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