संतों का समर्थन: स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती का कहना है कि उज्जैन है समय का प्राचीन केंद्र
सारांश
Key Takeaways
- महाकाल स्टैंडर्ड टाइम (एमएसटी) का समर्थन संतों द्वारा किया गया।
- उज्जैन का खगोलीय महत्व है।
- संतों ने कहा कि यह भारतीय संस्कृति को नई पहचान देगा।
- जीएमटी की जगह एमएसटी को अपनाने का प्रस्ताव।
- सनातन परंपरा और खगोलीय ज्ञान का महत्व।
नई दिल्ली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा महाकाल स्टैंडर्ड टाइम (एमएसटी) को ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) के स्थान पर अपनाने के प्रस्ताव पर देशभर के संतों और महंतों ने जोरदार समर्थन व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह समय है कि पूरी दुनिया भारतीय सनातन परंपरा और प्राचीन खगोलीय ज्ञान के अनुरूप महाकाल स्टैंडर्ड टाइम को वैश्विक समय प्रणाली के रूप में स्वीकार करे।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री, पूज्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने नासिक से राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "वर्तमान जीएमटी प्रणाली भौगोलिक आधार पर निर्धारित है, जबकि भारत की सनातन परंपरा में 'महाकाल' को समय का परम आधार माना गया है। उज्जैन में स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग प्राचीन काल से समय और खगोलीय गणनाओं का केंद्र रहा है। अब पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति के अनुसार एमएसटी अपनाना चाहिए।"
ऋषिकेश से अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष स्वामी गोपालचार्य महाराज ने कहा, "सनातन परंपरा विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत सटीक है। हमारे ऋषि-मुनियों ने सैकड़ों वर्ष पहले ही ग्रहों की चाल, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण और पूर्णिमा की सटीक गणना कर ली थी। जीएमटी पर निर्भरता हमारी मानसिक गुलामी को दर्शाती है। यह विषय अत्यंत सुंदर है और इसमें प्रवेश करने से पहले सनातन परंपरा की सुदृढ़ता को समझना आवश्यक है।"
मीरजापुर से श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अष्टकौशल महंत डॉ. योगानंद गिरी ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान का समर्थन करते हुए कहा, "उज्जैन मृत्युलोक में ज्योतिर्लिंगों का केंद्र बिंदु है, जबकि कर्क रेखा का केंद्र छत्तीसगढ़ के सरगुजा में है। जो जहां का केंद्र है, उसे वहीं रहना चाहिए। इतिहास को विकृत करने का प्रयास नहीं होना चाहिए।"
अयोध्या धाम से कई प्रमुख संतों ने भी इस प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया। आर्य संत वरुण दास जी महाराज, सतेंद्र दास वेदांती जी महाराज (महंत राम जानकी मंदिर), सीताराम दास जी महाराज (महंत साकेत भवन मंदिर) और महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज (सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी) ने कहा कि महाकाल स्टैंडर्ड टाइम अपनाने से भारतीय संस्कृति को नई पहचान मिलेगी। यह एक सकारात्मक कदम है।
इस विषय पर संत समुदाय का एकमत होकर कहना है कि उज्जैन प्राचीन काल से ही विश्व की समय गणना का केंद्र रहा है। यहां की खगोलीय परंपरा और महाकालेश्वर मंदिर का महत्व वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है। संतों का कहना है कि एमएसटी अपनाने से न केवल भारतीय सांस्कृतिक गौरव बढ़ेगा, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह अधिक तर्कसंगत और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ा होगा।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उज्जैन में 'महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह प्रस्ताव रखा है। उन्होंने बताया कि उज्जैन कर्क रेखा से गुजरता है और प्राचीन काल में यहां से ही विश्व की समय गणना होती थी। अब जीएमटी की जगह एमएसटी को अपनाने का समय आ गया है।