क्या सरकार ने उर्वरक सब्सिडी प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बना दिया?

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क्या सरकार ने उर्वरक सब्सिडी प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बना दिया?

सारांश

सरकार ने उर्वरक सब्सिडी प्रणाली को पूरी तरह से डिजिटल बना दिया है। यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप है और इससे पारदर्शिता और कुशलता में वृद्धि होगी। जानिए इस नये परिवर्तन के बारे में विस्तार से।

Key Takeaways

  • डिजिटल प्रणाली से वित्तीय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • मैनुअल प्रक्रियाओं की समाप्ति होगी।
  • किसानों के लिए सब्सिडी का प्रबंधन सरल होगा।
  • यह प्रणाली धोखाधड़ी को रोकने में सहायक होगी।
  • प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकारी कार्यों में सुधार होगा।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, उर्वरक विभाग ने डिजिटल शासन और वित्तीय सुधारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने गुरुवार को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में ई-बिल प्रणाली का उद्घाटन किया, जिससे सरकार लगभग 2 लाख करोड़ रुपए की उर्वरक सब्सिडी की प्रक्रिया कर सकेगी।

केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि यह ऑनलाइन प्रणाली पारदर्शी, कुशल और प्रौद्योगिकी-आधारित शासन को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने कहा कि यह शुभारंभ विभाग के वित्तीय कार्यों के आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह प्रणाली मैनुअल, कागजी कार्यों से पूरी तरह डिजिटल हो जाती है, जिससे बिलों के भौतिक हस्तांतरण की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

यह पहल उर्वरक विभाग की एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और वित्त मंत्रालय के लेखा महानियंत्रक के पीएफएमएस के बीच अद्वितीय तकनीकी साझेदारी का एक महत्वपूर्ण परिणाम है।

सीसीए संतोष कुमार ने कहा कि यह परिवर्तन सभी वित्तीय लेन-देन के लिए एक केंद्रीकृत और छेड़छाड़-रहित डिजिटल ऑडिट ट्रेल बनाकर पारदर्शिता और जवाबदेही को काफी बढ़ाता है, जिससे निगरानी और ऑडिट आसान हो जाते हैं। यह प्रणाली वरिष्ठ अधिकारियों को व्यय की वास्तविक समय की निगरानी और मजबूत वित्तीय नियंत्रण प्रदान करती है।

विभाग की आंतरिक प्रणाली और पीएफएमएस के बीच निर्बाध डेटा आदान-प्रदान से डेटा की दोहराव वाली प्रविष्टि समाप्त हो जाती है, मैनुअल त्रुटियां कम हो जाती हैं और समग्र प्रसंस्करण दक्षता और डेटा सटीकता में सुधार होता है।

जेएस (वित्त एवं लेखा) मनोज सेठी ने कहा कि यह प्रणाली संपूर्ण डिजिटल बिल प्रसंस्करण को सक्षम बनाती है, जिससे भुगतान की समयबद्धता में उल्लेखनीय तेजी आएगी।

इसके अतिरिक्त, ई-बिल प्लेटफॉर्म उर्वरक कंपनियों को ऑनलाइन दावे प्रस्तुत करने और वास्तविक समय में भुगतान की स्थिति को ट्रैक करने की सुविधा प्रदान करता है।

उन्होंने बताया कि यह विभाग भर में एक मानक इलेक्ट्रॉनिक कार्यप्रवाह लागू करेगा, जिससे बिल प्रबंधन में एकरूपता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। यह एकीकरण आईटी सिस्टम के अलग-अलग विभागों को कम करता है।

एनआईसी के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक असीम गुप्ता ने समाधान की तकनीकी उत्कृष्टता और निर्बाध संरचना के बारे में विस्तार से बताया।

एकीकृत ई-बिल प्रणाली वित्तीय प्रशासन को सुदृढ़ बनाती है, जिसमें पूर्वनिर्धारित मानदंडों के आधार पर भुगतानों को सत्यापित करने और धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने के लिए मजबूत अंतर्निहित नियंत्रण शामिल हैं।

Point of View

बल्कि यह अन्य सरकारी विभागों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा। डिजिटल प्रणाली अपनाने से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ेगा, जो अंततः नागरिकों के लिए लाभकारी होगा।
NationPress
01/01/2026

Frequently Asked Questions

उर्वरक सब्सिडी प्रणाली का डिजिटल होना किसके लिए फायदेमंद है?
यह प्रणाली किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से सब्सिडी प्रदान करने में मदद करेगी।
क्या इस प्रणाली से धोखाधड़ी में कमी आएगी?
हाँ, यह प्रणाली मजबूत अंतर्निहित नियंत्रणों के माध्यम से धोखाधड़ी के जोखिम को कम करेगी।
इस प्रणाली का उपयोग कैसे किया जाएगा?
उर्वरक कंपनियाँ ऑनलाइन दावे प्रस्तुत कर सकेंगी और वास्तविक समय में भुगतान की स्थिति को ट्रैक कर सकेंगी।
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