9 अक्टूबर 2026
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सिंधिया का मस्क के आरोपों पर पलटवार: भारत किसी क्षेत्र में एकाधिकार नहीं देता, 3 कंपनियों को सैटकॉम लाइसेंस

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सिंधिया का मस्क के आरोपों पर पलटवार: भारत किसी क्षेत्र में एकाधिकार नहीं देता, 3 कंपनियों को सैटकॉम लाइसेंस

सारांश

एलन मस्क के भेदभाव के आरोपों के बीच संचार मंत्री सिंधिया का करारा जवाब — भारत में तीन कंपनियों को सैटकॉम लाइसेंस मिले हैं, नियम सबके लिए एकसमान हैं। गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी मिलते ही सभी कंपनियाँ सेवाएं शुरू कर सकती हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 9 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता।
भारत में GMPCS श्रेणी के तहत तीन सैटकॉम कंपनियों को दूरसंचार लाइसेंस जारी किए गए हैं; सभी के लिए नियम एकसमान हैं।
वाणिज्यिक परिचालन की अंतिम मंजूरी गृह मंत्रालय के सुरक्षा आकलन पर निर्भर है; DoT अस्थायी मंजूरियाँ पहले ही दे चुका है।
सरकार ने एलन मस्क के भेदभावपूर्ण नीति के आरोपों को सिरे से खारिज किया।
भारत में अब 1.1 अरब ब्रॉडबैंड कनेक्शन और 99.9% ज़िलों में 5G कवरेज उपलब्ध है।
सिंधिया ने राहुल गांधी द्वारा मस्क का बचाव किए जाने पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 9 अक्टूबर 2026 को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के मंच से स्पष्ट किया कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। उनका यह बयान अरबपति उद्यमी एलन मस्क के उन आरोपों के जवाब में आया है, जिनमें कहा गया था कि भारत सैटेलाइट संचार (सैटकॉम) नियमों को भेदभावपूर्ण तरीके से लागू कर रहा है।

सिंधिया का सीधा जवाब

सिंधिया ने IMC 2026 के दौरान कहा, 'एक विशेष कंपनी को लेकर काफी चर्चा हो रही है, लेकिन तीन कंपनियों को सैटकॉम लाइसेंस मिले हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि सैटेलाइट संचार सेवा प्रदाता राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं और निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद ही अपना परिचालन शुरू कर सकते हैं — और यह नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू है।

संचार मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया कि गैर-भूस्थिर उपग्रह नेटवर्क संचालित करने वाली ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) सेवा के तीन प्रदाताओं को दूरसंचार लाइसेंस जारी किए गए हैं, और सभी लाइसेंसधारकों के लिए नियामकीय तथा सुरक्षा अनुपालन की शर्तें एकसमान हैं।

सुरक्षा मंजूरी की अड़चन

संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने IMC 2026 की साइडलाइन में बातचीत में बताया कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं की वाणिज्यिक शुरुआत फिलहाल गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी मिलने का इंतजार कर रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सभी सैटकॉम कंपनियाँ नियामकीय प्रक्रिया के लगभग समान चरण में हैं।

पेम्मासानी ने कहा, 'अब सुरक्षा मंजूरी का मामला गृह मंत्रालय के पास लंबित है। जैसे ही मंजूरी मिल जाएगी, उन्हें यह मिल जाएगी। इसका किसी एक कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है।' दूरसंचार विभाग (DoT) सैटकॉम सेवा प्रदाताओं को लाइसेंस और स्पेक्ट्रम से संबंधित अस्थायी मंजूरियाँ पहले ही जारी कर चुका है।

कांग्रेस पर तीखा प्रहार

विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मस्क का बचाव किए जाने के बाद सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस को खुद नहीं पता कि वह 'बाएं जा रही है या दाएं।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सैटकॉम विवाद एक राजनीतिक रंग भी ले चुका है।

भारत की डिजिटल प्रगति पर जोर

सिंधिया ने इस अवसर पर कनेक्टिविटी और डिजिटल बुनियादी ढाँचे में भारत की उपलब्धियों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि देश में अब 1.1 अरब ब्रॉडबैंड कनेक्शन हो चुके हैं और 99.9% ज़िलों में 5G कवरेज उपलब्ध है। यह आँकड़े भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को रेखांकित करते हैं, जिसके चलते सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाज़ार में वैश्विक खिलाड़ियों की दिलचस्पी बढ़ी है।

आगे क्या होगा

गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी मिलते ही सभी तीन लाइसेंसधारी सैटकॉम कंपनियाँ वाणिज्यिक सेवाएं शुरू करने के लिए स्वतंत्र होंगी। सरकार का रुख स्पष्ट है — नियामकीय प्रक्रिया किसी एक कंपनी के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी के लिए एकसमान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि लाइसेंस और वास्तविक परिचालन के बीच की खाई को कौन भर रहा है और कब। गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी की प्रक्रिया की समयसीमा सार्वजनिक नहीं है, जिससे यह आरोप लगाना आसान हो जाता है कि देरी किसी एक खिलाड़ी को फायदा पहुँचा रही है। राहुल गांधी का मस्क का बचाव करना राजनीतिक दृष्टि से असामान्य है, और सिंधिया ने इस अंतर्विरोध को चतुराई से भुनाया — लेकिन इससे सैटकॉम नीति की पारदर्शिता का मूल प्रश्न अनुत्तरित रहता है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में सैटकॉम विवाद क्या है और एलन मस्क ने क्या आरोप लगाए?
एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत सैटेलाइट संचार नियमों को भेदभावपूर्ण तरीके से लागू कर रहा है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि GMPCS श्रेणी की तीन कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं और सभी के लिए नियम एकसमान हैं।
भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं कब शुरू होंगी?
संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी के अनुसार, DoT अस्थायी मंजूरियाँ दे चुका है, लेकिन वाणिज्यिक परिचालन गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी पर निर्भर है। मंजूरी की समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।
भारत में सैटकॉम लाइसेंस किन तीन कंपनियों को मिले हैं?
सरकार ने GMPCS श्रेणी के तहत तीन कंपनियों को दूरसंचार लाइसेंस देने की बात कही है, हालाँकि आधिकारिक बयान में इनके नाम स्पष्ट रूप से नहीं बताए गए। संचार मंत्रालय ने कहा कि सभी लाइसेंसधारकों के लिए नियामकीय शर्तें एकसमान हैं।
राहुल गांधी का सैटकॉम विवाद से क्या संबंध है?
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर मस्क का बचाव किया था। इस पर संचार मंत्री सिंधिया ने कटाक्ष किया कि कांग्रेस को खुद नहीं पता वह 'बाएं जा रही है या दाएं', जो इस विवाद का राजनीतिक आयाम उजागर करता है।
भारत की मौजूदा डिजिटल कनेक्टिविटी की स्थिति क्या है?
संचार मंत्री सिंधिया के अनुसार, भारत में अभी 1.1 अरब ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं और 99.9% ज़िलों में 5G कवरेज उपलब्ध है। यही कारण है कि वैश्विक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड कंपनियाँ भारतीय बाज़ार में प्रवेश के लिए उत्सुक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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