एलन मस्क के बयान बचकाने हैं, भारत में व्यापार चाहिए तो कानून मानना होगा: भाजपा सांसद सुजीत कुमार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने 10 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर में टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क के भारत सरकार एवं रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी पर दिए जा रहे बयानों को 'बचकाना और नखरेबाजी' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में कारोबार करने की इच्छा रखने वाले किसी भी उद्यमी को यहाँ के कानूनों और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा — चाहे वह कितने भी बड़े नाम क्यों न हों।
स्टारलिंक लाइसेंस विवाद की पृष्ठभूमि
इन दिनों एलन मस्क स्टारलिंक को भारत में परिचालन लाइसेंस न मिलने को लेकर भारत सरकार और मुकेश अंबानी पर सोशल मीडिया समेत विभिन्न मंचों पर तीखे बयान दे रहे हैं। इस विवाद की जड़ में उपग्रह स्पेक्ट्रम आवंटन नीति है, जिस पर मस्क और भारतीय दूरसंचार उद्योग के बीच तीखे मतभेद हैं।
सांसद सुजीत कुमार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'जब बच्चों को खिलौने या मनचाही चीज़ नहीं मिलती, तो वे नखरे दिखाते हैं — एलन मस्क का व्यवहार बिल्कुल वैसा ही है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सैटेलाइट कारोबार एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जिसका सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से है।
सुरक्षा मानकों पर सांसद का कड़ा रुख
सुजीत कुमार ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया एक निर्धारित मानक प्रक्रिया के तहत होती है, जिसमें विस्तृत सुरक्षा जाँच अनिवार्य है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, 'आप एक सुपर बॉस की तरह व्यवहार नहीं कर सकते और फिर यह अपेक्षा रखें कि केवल आपके नाम की वजह से ज़रूरी शर्तों में छूट दी जाए।'
उन्होंने जोड़ा कि भारत ने हमेशा निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण नीतियों का पालन किया है। उनके अनुसार, 'सिर्फ बचकाने सोशल मीडिया पोस्ट करने से कारोबार नहीं होता — यह काम कानून के दायरे में, तय प्रक्रिया से होगा।'
विपक्ष और ईवीएम विवाद पर सांसद की टिप्पणी
इसी दौरान सुजीत कुमार ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल ईवीएम, एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग में असहमति जैसे मुद्दे बारी-बारी से उठाकर सिर्फ प्रासंगिक बने रहने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने असम के हालिया शहरी निकाय चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ मतपत्र से मतदान हुआ था और कांग्रेस 44 या 46 में से केवल दो निकायों में जीत सकी। उन्होंने सवाल किया कि जब ईवीएम नहीं था, तब भी हार हुई — तो दोष किसे देंगे?
सांसद ने यह भी कहा कि उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को दिए गए आश्वासन का विवरण नहीं पता, इसलिए वे उस विषय पर टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे।
कानून-व्यवस्था पर सरकार के रुख का समर्थन
सुजीत कुमार ने कहा कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह कानून-व्यवस्था एवं स्थिरता बनाए रखे और नागरिकों में विश्वास जगाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हर नागरिक और समूह को है, बल्कि यह उनका कर्तव्य भी है कि वे सरकार की नीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाएं।
हालाँकि, उन्होंने सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने तथा महिला पुलिसकर्मियों के उत्पीड़न की घटनाओं की कड़ी निंदा की। उनके अनुसार, जिस तरह का व्यवहार सोशल मीडिया पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ होते दिख रहा है, वह किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है।
आगे क्या
स्टारलिंक के भारत में लाइसेंस का मुद्दा अभी भी अनिर्णीत है और दूरसंचार विभाग की समीक्षा प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। सुजीत कुमार के बयान से स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ BJP भी इस मामले में सरकार के रुख का समर्थन कर रही है और किसी भी विदेशी कंपनी को नियामकीय प्रक्रिया में विशेष छूट देने के पक्ष में नहीं है।