11 अक्टूबर 2026
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एलन मस्क के बयान बचकाने हैं, भारत में व्यापार चाहिए तो कानून मानना होगा: भाजपा सांसद सुजीत कुमार

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एलन मस्क के बयान बचकाने हैं, भारत में व्यापार चाहिए तो कानून मानना होगा: भाजपा सांसद सुजीत कुमार

सारांश

भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने स्टारलिंक लाइसेंस न मिलने पर एलन मस्क के बयानों को 'बच्चों के नखरे' करार दिया। उनका संदेश साफ है — भारत निष्पक्ष नीति पर चलता है, कोई भी नाम सुरक्षा जाँच से ऊपर नहीं है।

मुख्य बातें

भाजपा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने 10 अक्टूबर 2026 को एलन मस्क के बयानों को 'बचकाना और नखरेबाजी' करार दिया।
मस्क, स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस न मिलने को लेकर भारत सरकार और मुकेश अंबानी पर निशाना साध रहे हैं।
सांसद ने कहा — सैटेलाइट क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है और स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए विस्तृत सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य है।
उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा — असम शहरी निकाय चुनावों में 44-46 में से केवल 2 सीटें जीतने पर ईवीएम को दोष देना 'भ्रामक रणनीति' बताया।
स्टारलिंक के भारत लाइसेंस पर दूरसंचार विभाग की समीक्षा प्रक्रिया अभी जारी बताई जा रही है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने 10 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर में टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क के भारत सरकार एवं रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी पर दिए जा रहे बयानों को 'बचकाना और नखरेबाजी' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में कारोबार करने की इच्छा रखने वाले किसी भी उद्यमी को यहाँ के कानूनों और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा — चाहे वह कितने भी बड़े नाम क्यों न हों।

स्टारलिंक लाइसेंस विवाद की पृष्ठभूमि

इन दिनों एलन मस्क स्टारलिंक को भारत में परिचालन लाइसेंस न मिलने को लेकर भारत सरकार और मुकेश अंबानी पर सोशल मीडिया समेत विभिन्न मंचों पर तीखे बयान दे रहे हैं। इस विवाद की जड़ में उपग्रह स्पेक्ट्रम आवंटन नीति है, जिस पर मस्क और भारतीय दूरसंचार उद्योग के बीच तीखे मतभेद हैं।

सांसद सुजीत कुमार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'जब बच्चों को खिलौने या मनचाही चीज़ नहीं मिलती, तो वे नखरे दिखाते हैं — एलन मस्क का व्यवहार बिल्कुल वैसा ही है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सैटेलाइट कारोबार एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जिसका सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से है।

सुरक्षा मानकों पर सांसद का कड़ा रुख

सुजीत कुमार ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया एक निर्धारित मानक प्रक्रिया के तहत होती है, जिसमें विस्तृत सुरक्षा जाँच अनिवार्य है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, 'आप एक सुपर बॉस की तरह व्यवहार नहीं कर सकते और फिर यह अपेक्षा रखें कि केवल आपके नाम की वजह से ज़रूरी शर्तों में छूट दी जाए।'

उन्होंने जोड़ा कि भारत ने हमेशा निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण नीतियों का पालन किया है। उनके अनुसार, 'सिर्फ बचकाने सोशल मीडिया पोस्ट करने से कारोबार नहीं होता — यह काम कानून के दायरे में, तय प्रक्रिया से होगा।'

विपक्ष और ईवीएम विवाद पर सांसद की टिप्पणी

इसी दौरान सुजीत कुमार ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल ईवीएम, एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग में असहमति जैसे मुद्दे बारी-बारी से उठाकर सिर्फ प्रासंगिक बने रहने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने असम के हालिया शहरी निकाय चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ मतपत्र से मतदान हुआ था और कांग्रेस 44 या 46 में से केवल दो निकायों में जीत सकी। उन्होंने सवाल किया कि जब ईवीएम नहीं था, तब भी हार हुई — तो दोष किसे देंगे?

सांसद ने यह भी कहा कि उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को दिए गए आश्वासन का विवरण नहीं पता, इसलिए वे उस विषय पर टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे।

कानून-व्यवस्था पर सरकार के रुख का समर्थन

सुजीत कुमार ने कहा कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह कानून-व्यवस्था एवं स्थिरता बनाए रखे और नागरिकों में विश्वास जगाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हर नागरिक और समूह को है, बल्कि यह उनका कर्तव्य भी है कि वे सरकार की नीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाएं।

हालाँकि, उन्होंने सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने तथा महिला पुलिसकर्मियों के उत्पीड़न की घटनाओं की कड़ी निंदा की। उनके अनुसार, जिस तरह का व्यवहार सोशल मीडिया पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ होते दिख रहा है, वह किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है।

आगे क्या

स्टारलिंक के भारत में लाइसेंस का मुद्दा अभी भी अनिर्णीत है और दूरसंचार विभाग की समीक्षा प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। सुजीत कुमार के बयान से स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ BJP भी इस मामले में सरकार के रुख का समर्थन कर रही है और किसी भी विदेशी कंपनी को नियामकीय प्रक्रिया में विशेष छूट देने के पक्ष में नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारत सरकार के उस रुख की राजनीतिक पुष्टि है कि स्पेक्ट्रम नीति पर कोई समझौता नहीं होगा — चाहे दबाव विश्व के सबसे चर्चित अरबपति की तरफ से ही क्यों न आए। दिलचस्प यह है कि मस्क, जो पश्चिम में सरकारी नियमन के खिलाफ मुखर रहते हैं, भारत में एक ऐसी नियामकीय प्रक्रिया से टकरा रहे हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर पूरी तरह उचित ठहराई जा सकती है। मुख्यधारा की कवरेज इस विवाद को 'मस्क बनाम अंबानी' के कारोबारी संघर्ष तक सीमित कर देती है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या भारत की उपग्रह स्पेक्ट्रम नीति सभी कंपनियों के लिए वाकई एक समान है — और इसका जवाब सरकार को पारदर्शिता के साथ देना होगा।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलन मस्क और स्टारलिंक का भारत लाइसेंस विवाद क्या है?
स्टारलिंक, जो एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की उपग्रह इंटरनेट सेवा है, को भारत में परिचालन लाइसेंस अभी तक नहीं मिला है। इसके पीछे स्पेक्ट्रम आवंटन प्रक्रिया और अनिवार्य सुरक्षा मंजूरियाँ मुख्य कारण बताई जाती हैं।
भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने मस्क के बारे में क्या कहा?
भाजपा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि मस्क का व्यवहार 'बचकाना और नखरेबाजी' जैसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में कारोबार करने के लिए देश के कानूनों और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है — किसी को भी विशेष छूट नहीं मिलेगी।
स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस के लिए किन शर्तों को पूरा करना होगा?
सांसद सुजीत कुमार के अनुसार, सैटेलाइट कारोबार एक संवेदनशील क्षेत्र है और इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों, निगरानी एजेंसियों तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों से विस्तृत मंजूरी लेना अनिवार्य है। स्पेक्ट्रम आवंटन एक तय मानक प्रक्रिया के तहत होता है जिसमें जल्दबाजी नहीं होती।
क्या एलन मस्क का विवाद मुकेश अंबानी से भी जुड़ा है?
हाँ, रिपोर्टों के अनुसार मस्क ने स्टारलिंक लाइसेंस विवाद के सिलसिले में भारत सरकार के साथ-साथ मुकेश अंबानी पर भी बयान दिए हैं। हालाँकि इन आरोपों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
सुजीत कुमार ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
सुजीत कुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर ईवीएम, एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग जैसे मुद्दों को बारी-बारी उठाकर सिर्फ प्रासंगिक बने रहने की 'भ्रामक रणनीति' अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने असम शहरी निकाय चुनावों का उदाहरण दिया जहाँ मतपत्र से हुए मतदान में कांग्रेस केवल दो सीटें जीत सकी।
राष्ट्र प्रेस
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