9 अक्टूबर 2026
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स्टारलिंक विवाद पर राजीव चंद्रशेखर: भारत राष्ट्रीय सुरक्षा व संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा

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स्टारलिंक विवाद पर राजीव चंद्रशेखर: भारत राष्ट्रीय सुरक्षा व संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा

सारांश

स्टारलिंक विवाद पर BJP केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने साफ कहा — एलन मस्क की एक पोस्ट से भारत की नीति नहीं बदलेगी। गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी प्रक्रिया सभी सैटेलाइट कंपनियों पर समान रूप से लागू है और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।

मुख्य बातें

राजीव चंद्रशेखर ने 9 अक्टूबर 2026 को कहा कि कोई भी कारोबारी भारत सरकार की प्राथमिकताएँ नहीं बदल सकता।
स्टारलिंक सहित सभी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियाँ गृह मंत्रालय (MHA) से सुरक्षा मंजूरी के एक ही चरण में हैं।
चंद्रशेखर ने मस्क के 'प्रतिस्पर्धात्मक हित' के आरोप को 'बिल्कुल सच नहीं' बताया।
सरकार की टेक नीति 2021 के नीतिगत ढाँचे पर आधारित है — तकनीक सभी के लिए खुली और सुलभ होनी चाहिए।
H-1B वीज़ा विवाद पर चंद्रशेखर ने कहा कि अमेरिकी इकॉनमी को भारतीय टैलेंट की जरूरत है, लेकिन दुरुपयोग पर अंकुश स्वाभाविक है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) केरल के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 9 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि एलन मस्क की स्टारलिंक भले ही एक उल्लेखनीय तकनीकी इनोवेशन हो, लेकिन भारत सरकार अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक कारोबारी की सोशल मीडिया पोस्ट से सरकार की नीति-निर्माण प्रक्रिया नहीं बदलती।

मुख्य बयान: कोई कारोबारी सरकार की प्राथमिकताएँ नहीं बदल सकता

चंद्रशेखर ने कहा, 'कोई एक कारोबारी सरकार पर अपने लक्ष्यों, उद्देश्यों, जरूरी कामों या प्राथमिकताओं को बदलने के लिए दबाव नहीं डाल सकता। भले ही एलन दुनिया के सबसे होनहार जीनियस और सबसे सफल भविष्यवादी कारोबारियों में से एक हैं और उनका स्टारलिंक निश्चित रूप से एक बेहतरीन कंपनी और हाल के समय का सबसे बड़ा मोबिलिटी इनोवेशन है, फिर भी भारत सरकार को वही करना होगा जो उसकी जिम्मेदारी है — यानी अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, अपनी संप्रभुता और अपने लोगों की रक्षा करना।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब स्टारलिंक सहित अन्य सैटेलाइट संचार कंपनियाँ गृह मंत्रालय (MHA) से सुरक्षा मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। गौरतलब है कि भारत में सेवा शुरू करने के लिए आवेदन करने वाली सभी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियाँ फिलहाल एक ही नियामक चरण में हैं।

सुरक्षा मंजूरी प्रक्रिया और समान व्यवहार

चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि मस्क का यह दावा कि मंजूरी में देरी के पीछे कोई प्रतिस्पर्धात्मक हित है, 'बिल्कुल सच नहीं है।' उन्होंने कहा, 'सैटेलाइट टेक्नोलॉजी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बिल्कुल अलग तरह की चुनौती पेश करती है। अभी जो सिक्योरिटी क्लीयरेंस की प्रक्रिया चल रही है, उसमें हर प्रोवाइडर और हर आवेदक की सुरक्षा और भरोसे से जुड़े मुद्दों की बारीकी से जांच की जाएगी।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रक्रिया के लिए 'सब्र की जरूरत है, जल्दबाजी की नहीं।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार टेक सेक्टर में 2021 में बनाए गए एक नीतिगत ढाँचे के सिद्धांतों पर काम करती है, जिसके तहत तकनीक सभी के लिए खुली और सुलभ होनी चाहिए।

H-1B वीज़ा विवाद पर चंद्रशेखर का नज़रिया

चंद्रशेखर ने अपने निजी अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि वे स्वयं छह वर्षों तक अमेरिका में काम कर चुके हैं और H-1B तथा ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का लाभ उठा चुके हैं। उन्होंने कहा, 'किसी के भी मन में, यहाँ तक कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के मन में भी, इस बात को लेकर कोई शक नहीं है कि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अमेरिका की लीडरशिप को आगे बढ़ाने में भारतीय टैलेंट ने अहम भूमिका निभाई है।'

साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ भारतीय और अमेरिकी कंपनियों ने H-1B वीज़ा प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है, जिसके चलते अमेरिकी सरकार उन पर अंकुश लगाने के कदम उठा रही है। उनके अनुसार, कुल मिलाकर 'अमेरिकी इकॉनमी को भारतीय टैलेंट की जरूरत है और भारतीय टैलेंट अमेरिकी मौकों की तलाश में रहता है।'

व्यापक संदर्भ: स्टारलिंक विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब सुर्खियों में आया जब एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि स्टारलिंक को भारत में मंजूरी मिलने में हो रही देरी के पीछे प्रतिस्पर्धात्मक कारण हैं। चंद्रशेखर का यह बयान सरकार की ओर से एक स्पष्ट और सुविचारित प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, जो यह रेखांकित करती है कि भारत की नीतियाँ बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि संस्थागत प्रक्रिया के आधार पर तय होती हैं।

आगे क्या होगा

गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी प्रक्रिया जारी है और सभी आवेदक कंपनियाँ उसी प्रक्रिया में हैं। जब तक यह मंजूरी नहीं मिलती, स्टारलिंक सहित कोई भी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी भारत में वाणिज्यिक सेवाएँ शुरू नहीं कर पाएगी। चंद्रशेखर के बयान से स्पष्ट है कि सरकार इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की जल्दबाजी के पक्ष में नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजीव चंद्रशेखर ने स्टारलिंक विवाद पर क्या कहा?
चंद्रशेखर ने कहा कि स्टारलिंक एक बेहतरीन इनोवेशन है, लेकिन भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक कारोबारी की सोशल मीडिया पोस्ट से सरकार की नीति-निर्माण प्रक्रिया नहीं बदलती।
भारत में स्टारलिंक को मंजूरी क्यों नहीं मिली है?
स्टारलिंक सहित सभी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियाँ गृह मंत्रालय (MHA) से सुरक्षा मंजूरी का इंतजार कर रही हैं और सभी एक ही नियामक चरण में हैं। चंद्रशेखर के अनुसार, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक विशेष प्रकार की चुनौती पेश करती है, इसलिए हर आवेदक की बारीकी से जाँच जरूरी है।
एलन मस्क ने भारत पर क्या आरोप लगाया था?
एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि स्टारलिंक को भारत में मंजूरी मिलने में हो रही देरी के पीछे प्रतिस्पर्धात्मक हित हैं। चंद्रशेखर ने इस दावे को 'बिल्कुल सच नहीं' बताते हुए कहा कि सभी कंपनियों के साथ समान व्यवहार हो रहा है।
भारत की टेक नीति का क्या ढाँचा है?
चंद्रशेखर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 2021 में बनाए गए एक नीतिगत ढाँचे पर काम करती है, जिसका मूल सिद्धांत है कि तकनीक सभी के लिए खुली और सुलभ होनी चाहिए। यह ढाँचा किसी एक कंपनी को विशेष लाभ देने की अनुमति नहीं देता।
H-1B वीज़ा विवाद पर चंद्रशेखर का क्या मत है?
चंद्रशेखर ने कहा कि भारतीय टैलेंट ने अमेरिकी टेक्नोलॉजी की लीडरशिप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालाँकि, कुछ कंपनियों द्वारा H-1B प्रक्रिया के दुरुपयोग के चलते अमेरिकी सरकार का अंकुश लगाना स्वाभाविक है — कुल मिलाकर दोनों देशों के बीच टैलेंट का आदान-प्रदान परस्पर लाभकारी बना रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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