बिहार में भाजपा का नया मुख्यमंत्री, जनता की भलाई के लिए कदम उठाए: सीमा मलिक
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार का इस्तीफा और सम्राट चौधरी का नया मुख्यमंत्री बनना।
- बिहार में रोजगार की स्थिति चिंताजनक है।
- महिला आरक्षण बिल का समर्थन।
- श्रमिकों की समस्याओं पर चिंता।
- राजनीतिक गिमिक के रूप में महिला आरक्षण बिल का आह्वान।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एनसीपी (एसपी) की नेता सीमा मलिक ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे पर अपनी चिंता जताते हुए कहा कि मुझे वहाँ की जनता के लिए बहुत दुख हो रहा है। लोगों ने नीतीश कुमार के चेहरे पर बहुत उम्मीदों के साथ वोट दिया था।
नई दिल्ली में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में सीमा मलिक ने कहा कि अब सम्राट चौधरी नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। हमें आशा है कि बिहार, जो एक गरीब राज्य है, वहाँ लोगों को रोजगार देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
सीमा मलिक ने जदयू कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे; यह उनके कार्यकर्ता और प्रवक्ता टीवी पर लगातार कहते रहे, लेकिन हमें पहले से पता था कि भाजपा कुछ और ही करने वाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा का पुराना खेल है।
उन्होंने कहा कि हम पहले ही कह चुके थे कि जो एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र में हुआ, वही बिहार में नीतीश कुमार के साथ दोहराया गया है। भाजपा को बिहार की मुख्यमंत्री पद की कुर्सी मिल गई है।
सीमा मलिक ने कहा कि बिहार में अभी भी जंगल राज कायम है। 20 वर्षों तक नीतीश कुमार की सरकार रही, लेकिन औद्योगिक विकास नहीं हुआ और नौकरियां नहीं मिलीं।
उन्होंने राजद नेता तेजस्वी यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि बिहार देश का सबसे गरीब राज्य बना हुआ है। प्रति व्यक्ति आय बेहद कम है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति बहुत खराब है। लोग काम की तलाश में बाहर पलायन करते हैं।
महिला आरक्षण बिल पर सीमा मलिक ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा इस बिल के समर्थन में रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 2023 में यह बिल लाकर केवल हाइप क्रिएट किया गया, लेकिन इसमें जनगणना और डेलिमिटेशन की शर्तें शामिल की गई हैं। चुनाव के समय महिलाओं को प्रभावित करने के लिए यह बिल लाया गया है। यह एक राजनीतिक गिमिक जैसा लगता है।
नोएडा में श्रमिकों की हड़ताल और हिंसा पर सीमा मलिक ने कहा कि हिंसा नहीं होनी चाहिए। प्रदर्शन करने का सभी को अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए।
उन्होंने मजदूरों की समस्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें मात्र 11,000 रुपए वेतन मिलता है, जबकि न्यूनतम मजदूरी 20,000 रुपए बताई जा रही है। 12 घंटे काम, कोई छुट्टी नहीं, बीमारी की छुट्टी नहीं-यह मानवाधिकार का मुद्दा है।