3 अगस्त 2026
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महाराष्ट्र दिवस पर जनगणना की स्व-गणना शुरू, रामदास अठावले बोले — जाति जनगणना से हर वर्ग को मिलेगा न्याय

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महाराष्ट्र दिवस पर जनगणना की स्व-गणना शुरू, रामदास अठावले बोले — जाति जनगणना से हर वर्ग को मिलेगा न्याय

सारांश

महाराष्ट्र दिवस पर जनगणना की स्व-गणना का शुभारंभ महज़ प्रशासनिक कदम नहीं — यह दशकों की माँग के बाद जाति-आधारित डेटा संग्रह की ऐतिहासिक शुरुआत है। केंद्रीय मंत्री अठावले का कहना है कि इससे रोज़गार, गरीबी और आवास के आँकड़े जाति-वार मिलेंगे — जो नीति-निर्माण को बदल सकते हैं।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र में 1 मई 2026 को राज्य स्थापना दिवस पर 2027 जनगणना की स्व-गणना प्रक्रिया शुरू हुई।
स्व-गणना 1 से 15 मई 2026 तक, इसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक घर-घर सर्वेक्षण होगा।
इस बार जनगणना में जाति-आधारित डेटा शामिल — पहले केवल अनुसूचित जाति और जनजाति तक सीमित था।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा — जाति जनगणना से रोज़गार, गरीबी, आवास की स्थिति जाति-वार पता चलेगी।
नागरिकों से जनगणना पोर्टल और घर-घर सर्वेक्षण में सहयोग की अपील की गई।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र स्थापना दिवस के अवसर पर घोषणा की कि राज्य में 2027 की जनगणना की स्व-गणना प्रक्रिया औपचारिक रूप से आरंभ हो गई है। अठावले ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि इस बार की जनगणना में जाति-आधारित डेटा संग्रह शामिल किया गया है, जिससे सरकार को प्रत्येक जाति और समुदाय की ज़रूरतों के अनुसार नीतियाँ बनाने में सहायता मिलेगी।

स्व-गणना प्रक्रिया का कार्यक्रम

स्व-गणना चरण 1 मई से 15 मई 2026 तक चलेगा, जिसमें नागरिक स्वयं जनगणना पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे। वर्तमान में देशभर के विभिन्न राज्यों में हाउस लिस्टिंग (HLO) जनगणना चल रही है, जिसके पश्चात जनसंख्या गणना (PE) का दौर शुरू होगा।

जाति जनगणना की विशेषता

अठावले ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि इस बार की जनगणना पिछली जनगणनाओं से मौलिक रूप से अलग है। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे आधिकारिक जनगणना प्रक्रिया में शामिल करना अपने आप में एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। असली सवाल यह है कि एकत्र किए गए जाति-आधारित आँकड़ों का उपयोग कैसे और किस नीतिगत ढाँचे में होगा — क्योंकि डेटा संग्रह और उसका न्यायसंगत उपयोग दो अलग चुनौतियाँ हैं। गौरतलब है कि OBC जनगणना की माँग लंबे समय से विभिन्न दलों की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा रही है, और इस कदम को उस संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। बिना पारदर्शी उपयोग नीति के, यह डेटा सामाजिक न्याय का औज़ार बनने की बजाय राजनीतिक ध्रुवीकरण का आधार बन सकता है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में जनगणना की स्व-गणना क्या है और यह कब तक चलेगी?
स्व-गणना वह प्रक्रिया है जिसमें नागरिक स्वयं जनगणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज करते हैं। महाराष्ट्र में यह प्रक्रिया 1 मई से 15 मई 2026 तक चलेगी, जिसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे।
इस बार की जनगणना में जाति जनगणना क्यों शामिल की गई है?
केंद्र सरकार ने 2027 की जनगणना में जाति-आधारित डेटा संग्रह को आधिकारिक रूप से शामिल करने का निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के अनुसार, पहले केवल अनुसूचित जाति और जनजाति की गणना होती थी, लेकिन इस बार प्रत्येक धर्म और जाति का डेटा एकत्र किया जाएगा।
जाति जनगणना से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
अठावले के अनुसार, जाति जनगणना से प्रत्येक जाति का जनसंख्या प्रतिशत, रोज़गार की स्थिति, किसानों की संख्या, गरीबी का स्तर और आवासहीन परिवारों का ब्योरा सामने आएगा। इससे सरकार को हर जाति और समुदाय की ज़रूरत के अनुसार लक्षित योजनाएँ बनाने में मदद मिलेगी।
जाति संबंधी जानकारी जनगणना के किस चरण में दर्ज होगी?
जाति संबंधी जानकारी जनगणना के दूसरे चरण — जनसंख्या गणना (Population Enumeration) — में दर्ज की जाएगी। पहले चरण में हाउस लिस्टिंग (HLO) की जाती है।
नागरिक जनगणना में कैसे भाग ले सकते हैं?
नागरिक जनगणना पोर्टल के माध्यम से 1 से 15 मई 2026 तक स्व-गणना कर सकते हैं। इसके अलावा 16 मई से 14 जून 2026 के बीच जब जनगणना अधिकारी घर आएँ, तब भी सहयोग करना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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