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क्या सभी धर्म समान नहीं होंगे तो धर्मनिरपेक्षता टिक पाएगी? आलोक कुमार

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क्या सभी धर्म समान नहीं होंगे तो धर्मनिरपेक्षता टिक पाएगी? आलोक कुमार

सारांश

क्या धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद को बचाना संभव है? आलोक कुमार ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर चिंता जताई है और धार्मिक समानता के महत्व को रेखांकित किया है। जानें उनके विचार और वर्तमान स्थिति पर उनका दृष्टिकोण।

मुख्य बातें

धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद को समझना आवश्यक है।
सभी धर्मों को समान मानने की आवश्यकता है।
पुरानी अवधारणाओं पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
धार्मिक स्थलों का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए।
सामाजिक एकता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

नई दिल्‍ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शब्दोत्सव 2026 के दौरान, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने शनिवार को बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के संबंध में गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि सभी धर्म समान नहीं होंगे, तो धर्मनिरपेक्षता नहीं टिक सकेगी।

आलोक कुमार ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि वहां हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और ईशनिंदा के आरोप में एक युवक की हत्या, केवल इस कारण से कि उसने सभी धर्मों को समान मानने की बात की थी, यह धर्मनिरपेक्षता की बुनियादी अवधारणा को चुनौती देती है। उन्होंने कहा कि यदि सभी धर्मों को समान नहीं माना जाएगा, तो धर्मनिरपेक्षता कैसे जीवित रह सकेगी? यह एक वैश्विक चुनौती है, जिसे सभी देशों को स्वीकार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिहाद जैसी पुरानी अवधारणाएं आज के सभ्य समाज में अस्वीकार्य हैं और इस पर स्पष्ट रुख अपनाने का समय आ गया है।

आलोक कुमार ने कहा कि वर्तमान तनावपूर्ण माहौल में इस तरह के मुद्दों पर चुप्पी साधना या गलत निर्णय लेना लोगों के जख्मों पर नमक डालने जैसा होता है। उन्होंने बताया कि बीसीसीआई द्वारा बांग्लादेशी खिलाड़ी को वापस भेजना एक उचित और समय पर उठाया गया कदम है।

उन्‍होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्षेत्र और उसके विकास को समझना आवश्यक है। राम जन्मभूमि आंदोलन एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है, लेकिन इसके अलावा भी हिंदू समाज को संगठित और सशक्त करने के कई पहलू हैं, जिन्हें एक पुस्तक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इस पुस्तक का लोकार्पण शब्दोत्सव 2026 में हुआ, जिसके लिए उन्होंने आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

वहीं, हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद के निर्माण पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए माधवी लता ने कहा कि कोई भी मंदिर या मस्जिद लोगों की आस्था और भक्ति के लिए होनी चाहिए, न कि राजनीतिक या निजी स्वार्थ के लिए। यदि किसी धार्मिक स्थल का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है, तो हर मुसलमान को इसका विरोध करने का अधिकार है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के विदेश दौरे पर टिप्पणी करते हुए माधवी लता ने कहा कि राहुल गांधी लाख कोशिशों के बावजूद देश में उठ रहे सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका एकमात्र उद्देश्य विदेश जाकर सवालों से बचना है, ताकि उन्हें भारत की जनता के सामने जवाब न देना पड़े।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोक कुमार के विचारों में गहरी चिंताएँ हैं। धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा को समझना और सभी धर्मों के प्रति समानता का भाव बनाए रखना न केवल आवश्यक है, बल्कि यह समाज की एकता की कुंजी है। वर्तमान स्थिति में हमें विवेक से कार्य करना होगा और सभी समुदायों के अधिकारों का सम्मान करना होगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शब्दोत्सव 2026 का उद्देश्य क्या है?
शब्दोत्सव 2026 का उद्देश्य विभिन्न धर्मों और संस्कृति के बीच संवाद को बढ़ावा देना और समाज में धर्मनिरपेक्षता को मजबूती देना है।
आलोक कुमार ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर क्या कहा?
आलोक कुमार ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों से धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद को खतरा है।
क्या धर्मनिरपेक्षता सिर्फ एक अवधारणा है?
नहीं, धर्मनिरपेक्षता एक व्यावहारिक सिद्धांत है, जिसका पालन सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार से होता है।
आलोक कुमार का क्या संदेश है?
आलोक कुमार का संदेश है कि सभी धर्मों को समान समझा जाना चाहिए, तभी धर्मनिरपेक्षता टिक सकती है।
क्या राजनीतिक स्वार्थ के लिए धार्मिक स्थलों का उपयोग उचित है?
नहीं, धार्मिक स्थलों का उपयोग केवल आस्था और भक्ति के लिए होना चाहिए, न कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए।
राष्ट्र प्रेस
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