क्या शहजाद पूनावाला का विपक्ष से सवाल, जनता सत्ता में नहीं लाएगी तो आप संविधान विरोधी बन जाएंगे?
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी के विदेशी दौरों पर सवाल उठाए गए हैं।
- भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने उन्हें पर्यटन के नेता कहा।
- कुछ दलों पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप है।
- डीएमके सरकार की नीतियों की आलोचना की गई है।
- राहुल गांधी को अपने विदेशी दौरे का खुलासा करना चाहिए।
नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के विदेश दौरे पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि वे अब पर्यटन के नेता बन चुके हैं। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि संसद सत्र के दौरान बर्लिन में छुट्टी मनाने के बाद वे अभी लौटे ही थे कि एक बार फिर नए साल का जश्न मनाने के लिए वियतनाम पहुंच गए हैं।
नई दिल्ली में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में शहजाद पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी कभी भी काम के मूड में नहीं रहते हैं। वे केवल छुट्टियों पर रहना पसंद करते हैं। अब तो ऐसा लगता है कि राहुल गांधी परमानेंट छुट्टी के मूड में हैं।
भाजपा नेता ने पीएम मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक हमेशा वर्क मोड में काम किया है। बिहार चुनाव का जिक्र करते हुए शहजाद पूनावाला ने कहा कि जनता ने देखा कि जब चुनाव हो रहे थे, तब राहुल गांधी जंगल सफारी का आनंद ले रहे थे। यह स्पष्ट करता है कि राहुल गांधी पार्ट टाइम नेता हैं और उन्हें यह बताना चाहिए कि वे विदेशी दौरों पर किनसे मिलते हैं।
जेजेपी के नेता अजय चौटाला और समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा के बयानों पर शहजाद पूनावाला ने कहा कि भाजपा का विरोध करते-करते कुछ राजनीतिक दल अब देश, लोकतंत्र, संविधान और अंबेडकर का विरोध करने लगे हैं। पहले अजय चौटाला ने कहा कि बांग्लादेश, श्रीलंका या नेपाल जैसी स्थिति उत्पन्न करनी चाहिए, हिंसा भड़कानी चाहिए। उनके नक्शेकदम पर चलते हुए अब समाजवादी पार्टी भी वही भाषा बोल रही है। कांग्रेस ने भी यही इच्छा जताई कि भारत में बांग्लादेश या नेपाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाए। इसका क्या मतलब है कि अगर जनता आपको सत्ता में नहीं लाएगी, तो आप संविधान विरोधी बन जाएंगे?
डीएमके को निशाने पर लेते हुए भाजपा नेता ने कहा कि यह बहुत दुखद है कि जब हाईकोर्ट ने दरगाह को अपने धार्मिक रीति-रिवाज और त्योहार मनाने की अनुमति दी, तो डीएमके सरकार तुरंत ऐसी चीजों की इजाजत दे देती है, लेकिन जब वही हाईकोर्ट हिंदुओं को दीया जलाने की अनुमति देता है, तो डीएमके सरकार उसे रोकती है, पुलिस लगाती है, हिंदू समुदाय के भक्तों को पीटती है और यहां तक कि निर्णय देने वाले जज पर महाभियोग चलाने की कोशिश करती है।