क्या श्रीधर को रेडियो को नई पहचान देने के लिए पद्मश्री मिला?

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क्या श्रीधर को रेडियो को नई पहचान देने के लिए पद्मश्री मिला?

सारांश

कोयंबटूर के वरिष्ठ रेडियो अधिकारी श्रीधर को 2026 के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने रेडियो प्रसारण में 55 वर्षों की सेवा देकर एक नई पहचान बनाई है। उनकी कहानी प्रेरणा और नवाचार से भरी है। जानिए उनके योगदान और विचारों के बारे में।

Key Takeaways

  • श्रीधर का पद्मश्री पुरस्कार रेडियो उद्योग में नवाचार की पहचान है।
  • रेडियो की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
  • श्रोताओं के लिए दिलचस्प कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
  • सामग्री की गुणवत्ता और नवीनता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
  • नई पीढ़ी को मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।

कोयंबटूर, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए कोयंबटूर के वरिष्ठ रेडियो अधिकारी श्रीधर को 2026 के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान किया है। श्रीधर ने रेडियो प्रसारण में 55 वर्षों तक निरंतर सेवा की है और भारतीय रेडियो क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

उनका करियर उस समय शुरू हुआ जब रेडियो जनसंचार का सबसे प्रभावशाली माध्यम था। समय के साथ टेलीविजन और डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बावजूद, उन्होंने रेडियो की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए। उन्होंने श्रोताओं की रुचि को ध्यान में रखते हुए कई नवीनतम और जनहित से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत की, जिससे रेडियो आम लोगों के जीवन का हिस्सा बना रहा।

सूत्रों के अनुसार, श्रीधर ने अपने कार्यकाल में न केवल कार्यक्रमों की गुणवत्ता पर ध्यान दिया, बल्कि रेडियो प्रबंधन, तकनीकी सुधार और सामग्री नवाचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि यदि सामग्री मजबूत और लोगों से जुड़ी हो, तो कोई भी माध्यम कभी पुराना नहीं होता। यही सोच उनके लंबे और सफल करियर का आधार बनी।

रिटायरमेंट के बाद भी श्रीधर रेडियो और मीडिया उद्योग से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं और नई पीढ़ी के प्रसारकों को मार्गदर्शन देते रहे हैं। उन्हें मिला पद्म श्री पुरस्कार न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान की पहचान है, बल्कि रेडियो उद्योग में काम कर रहे हजारों पेशेवरों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

पद्म श्री पुरस्कार की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीधर ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा, “अक्सर कहा जाता है कि रेडियो एक समाप्त होता हुआ माध्यम है, लेकिन अगर सही सामग्री और लोगों से जुड़ने वाले कार्यक्रम हों, तो रेडियो हमेशा जीवित रहेगा। मेरी जिंदगी का उद्देश्य रेडियो को लोगों के और करीब लाना रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे 2026 के लिए रेडियो प्रसारण के लिए पद्मश्री पुरस्कार पाकर बहुत सम्मानित महसूस हो रहा है। मेरी जानकारी के अनुसार, यह पहली बार है जब यह पुरस्कार रेडियो प्रबंधन में उत्कृष्टता के लिए दिया गया है, जो प्रसारण के संचालन और नवोन्मेषी पहलुओं को मान्यता देता है। यह पुरस्कार न केवल व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि यह रेडियो में नवाचार की पहचान है और अगली पीढ़ी के लिए प्रयोग जारी रखने, नवाचार करने और प्रसारण के भविष्य को आकार देने का एक आह्वान है।”

कोयंबटूर जिले में श्रीधर को यह सम्मान मिलने पर खुशी की लहर है और बड़ी संख्या में लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

Point of View

मैं मानता हूँ कि श्रीधर का यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की पहचान है, बल्कि यह रेडियो उद्योग के हजारों पेशेवरों के लिए एक प्रेरणा भी है। यह पुरस्कार इस बात का प्रमाण है कि सही सामग्री और नवाचार के साथ, रेडियो हमेशा जीवित रहेगा।
NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

श्रीधर को कब पद्मश्री पुरस्कार मिला?
उन्हें 2026 के लिए पद्मश्री पुरस्कार मिला।
रेडियो में श्रीधर का योगदान क्या है?
उन्होंने 55 वर्षों तक रेडियो प्रसारण में सेवा देकर एक नई पहचान बनाई है।
श्रीधर का मानना है कि रेडियो क्यों महत्वपूर्ण है?
उनका मानना है कि यदि सामग्री मजबूत और लोगों से जुड़ी हो, तो रेडियो कभी पुराना नहीं होता।
श्रीधर ने अपने कार्यकाल में क्या किया?
उन्होंने कार्यक्रमों की गुणवत्ता, रेडियो प्रबंधन, और तकनीकी सुधार पर ध्यान दिया।
श्रीधर का संदेश क्या है?
उनका उद्देश्य रेडियो को लोगों के और करीब लाना है।
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