क्या श्रीशैलम भ्रामराम्बिका मल्लिकार्जुन है देश का एकमात्र ज्योतिर्लिंग, जहां शिव-शक्ति एक साथ विराजमान हैं?
सारांश
Key Takeaways
- श्रीशैलम भ्रामराम्बिका मंदिर शिव और शक्ति का अद्वितीय संगम है।
- यह मंदिर भारत के १८ शक्ति पीठों में से एक है।
- देवी का अवतार और राक्षसों का वध करने की कथा इसे खास बनाती है।
- मंदिर परिसर में अनेक उप मंदिर और अद्भुत वास्तुकला है।
- यहां भक्तों की श्रद्धा और आस्था का अनूठा अनुभव होता है।
नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सृष्टि की सुरक्षा के लिए मां जगदम्बा ने अपने विभिन्न रूपों में अवतार लिया है, और हर अवतार की एक अलग कहानी और आध्यात्मिक महत्व है। आंध्र प्रदेश में मां जगदम्बा के कई मंदिर हैं, जहां वे भगवान शिव के साथ पार्वती के स्वरूप में विराजमान हैं, लेकिन १२ ज्योतिर्लिंगों में एक ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहां भगवान शिव अकेले नहीं हैं, बल्कि शक्ति के प्रतीक मां पार्वती भी यहां उपस्थित हैं।
यह देश का पहला ज्योतिर्लिंग है, जहां सृष्टि के संहारक और प्रकृति की देवी एक साथ विराजमान हैं। हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित नल्लामल्ला पहाड़ियों पर भगवान शिव और मां पार्वती के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्रीशैलम भ्रामराम्बिका (भ्रामरांबा) मल्लिकार्जुन की।
देश भर से भक्त यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर के परिसर में मां पार्वती एक अलग रूप में विराजमान हैं, जहां उनकी आठ भुजाएं हैं। मंदिर परिसर के पीछे सर्वशक्ति मां श्री शैलम भ्रामरांबा देवी की स्थापना की गई है। यह मंदिर भारत के १८ शक्ति पीठों में से एक है, जहां मां ने मधुमक्खी का अवतार लेकर राक्षस का वध किया था।
भ्रामराम्बिका देवी मंदिर मां भ्रामरांबा को समर्पित है, जो देवी पार्वती का एक स्वरूप हैं। देवी भगवान शिव के अवतार भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी की पत्नी हैं। इस मंदिर में देवी की पूजा ब्राह्मणी शक्ति के रूप में की जाती है। यहां माता को रेशमी साड़ी का भोग अर्पित किया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में संत अगस्त्य की पत्नी लोपामुद्रा की प्रतिमा है। गर्भगृह के सामने एक श्री यंत्र स्थापित है। भ्रामरांबा का अर्थ है "मधुमक्खियों की माता।" पौराणिक कथा के अनुसार, देवी भ्रामरांबा ने राक्षस अरुणासुर का वध करने के लिए आठ पैरों वाली मधुमक्खी का अवतार लिया था।
अरुणासुर नामक राक्षस भगवान ब्रह्मा का परम भक्त था। उसकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा ने उसे ऐसा वरदान दिया कि कोई भी दो या चार पैरों वाला प्राणी उसे मार नहीं सकता था। अहंकार से भरे राक्षस ने धरती पर आतंक मचाना शुरू कर दिया और देवलोक पर भी कब्जा कर लिया। तब घबराए देवता मां पार्वती के पास पहुंचे। राक्षस का वध करने के लिए मां ने मधुमक्खी का रूप धारण किया और उसका अंत कर शांति स्थापित की।
श्रीशैलम भ्रामराम्बिका मंदिर की वास्तुकला भी अविस्मरणीय है। गोपुरम पर भगवान गणेश की एक प्रतिमा है, और मंदिर परिसर में कई छोटे उप मंदिर भी स्थापित हैं। मंदिर परिसर में नंदीमंडप, वीरशिरोमंडप, मल्लिकार्जुन मंदिर, सहस्र लिंगेश्वर, अर्धनारीश्वर, वीरभद्र, उमा महेश्वर और नवब्रह्म मंदिर स्थापित हैं। कहा जाता है कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर भगवान गणेश भक्तों के पाप और पुण्यों का लेखा-जोखा रखते हैं।