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शिक्षा: बंधनों को तोड़ने का अंबेडकर का मंत्र, सिद्धारमैया ने जताई प्रतिबद्धता

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शिक्षा: बंधनों को तोड़ने का अंबेडकर का मंत्र, सिद्धारमैया ने जताई प्रतिबद्धता

सारांश

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अंबेडकर जयंती पर शिक्षा को बंधनों को तोड़ने का सबसे प्रभावी साधन बताया, जो उनके संघर्ष और विचारों को समर्पित है।

मुख्य बातें

शिक्षा अंबेडकर का योगदान भारतीय संविधान में महत्वपूर्ण है समाज में समानता और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष जातिवाद और छुआछूत को समाप्त करने की आवश्यकता सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास

बेंगलुरु, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि बीआर अंबेडकर द्वारा तैयार किया गया संविधान ही उनकी मुख्यमंत्री बनने की कुंजी है।

वे भारत रत्न और संविधान के निर्माता बीआर अंबेडकर की जयंती समारोह और अंबेडकर पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में बोल रहे थे, जो समाज कल्याण विभाग द्वारा विधान सौधा के भव्य सीढ़ियों पर आयोजित किया गया था।

मुख्यमंत्री ने अंबेडकर के विचारों को याद करते हुए कहा कि जब तक जाति व्यवस्था का अस्तित्व रहेगा, तब तक छुआछूत भी बनी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अंबेडकर ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि जब तक सामाजिक और आर्थिक असमानताएं मौजूद रहेंगी, तब तक जातिवाद का अंत नहीं होगा।

उन्होंने बताया कि अंबेडकर ने अपना संपूर्ण जीवन शोषितों, अनुसूचित जातियों और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा में समर्पित कर दिया। सिद्धारमैया ने आगे कहा कि अंबेडकर केवल दलितों के नेता नहीं थे, बल्कि अन्याय और भेदभाव का सामना कर रहे सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा थे।

संविधान के माध्यम से अंबेडकर ने सभी भारतीयों के लिए स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की स्थापना का प्रयास किया। सिद्धारमैया ने कहा कि यही कारण है कि भारत का संविधान विश्व के सबसे उत्कृष्ट संविधानों में से एक माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह दुखद है कि पूर्ण समानता अब तक प्राप्त नहीं हो सकी है। उन्होंने यह याद दिलाया कि अंबेडकर ने चेतावनी दी थी कि जब तक सामाजिक और आर्थिक असमानताएं समाप्त नहीं होतीं, तब तक भारत की स्वतंत्रता अधूरी रहेगी।

उन्होंने कहा कि विद्वान होने के बावजूद अंबेडकर ने न केवल शोषितों के लिए संघर्ष किया, बल्कि हिंदू समाज में सुधार के लिए भी गहन प्रयास किए। हालांकि, जब ये प्रयास विफल रहे, तो उन्होंने हिंदू धर्म को छोड़ दिया। अंबेडकर ने 'मनुवाद' को भी अस्वीकार कर दिया, जिसे उन्होंने असमानता का एक प्रमुख कारण माना।

सिद्धारमैया ने कहा कि आत्मनिर्भरता के लिए सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण आवश्यक है और अंबेडकर के शब्दों का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा ही लोगों को सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त करने का सबसे प्रभावी साधन है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि अंबेडकर शिक्षित न होते या उनमें प्रतिरोध की भावना न होती, तो भारत के लिए ऐसा संविधान संभव नहीं होता।

उन्होंने कहा कि अंबेडकर की सामाजिक व्यवस्था की गहरी समझ ने उन्हें एक व्यापक संविधान तैयार करने की क्षमता प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वैज्ञानिक शिक्षा के बिना एक समानता आधारित समाज का निर्माण असंभव है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार की गारंटी योजनाएं सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से बनाई गई हैं और समतावाद की दिशा में किए गए प्रयासों का प्रतीक हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हमें उनके मार्गदर्शन से आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्यों शिक्षा को बंधनों को तोड़ने का हथियार कहा गया है?
क्योंकि शिक्षा व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है और समाज में समानता लाने में मदद करती है।
अंबेडकर का योगदान क्या था?
उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता के लिए संघर्ष किया और भारतीय संविधान का निर्माण किया।
सिद्धारमैया ने अंबेडकर की जयंती पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि शिक्षा ही बंधनों को तोड़ने का सबसे शक्तिशाली हथियार है।
जातिवाद और छुआछूत का क्या संबंध है?
जातिवाद का अस्तित्व छुआछूत को बढ़ावा देता है, जो समाज में असमानता का कारण बनता है।
क्या अंबेडकर केवल दलितों के लिए संघर्षरत थे?
नहीं, वे सभी प्रकार के अन्याय का सामना करने वाले लोगों के लिए एक आवाज थे।
राष्ट्र प्रेस
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