क्या एसआईआर चुनाव आयोग की पहल राजनीतिकरण से बच पाएगी? - जयवीर सिंह
सारांश
Key Takeaways
- एसआईआर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रक्रिया राजनीतिकरण से मुक्त रहनी चाहिए।
- मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता लाने का उद्देश्य है।
- बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा मतदाता सूचियों की जांच की जाएगी।
- कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
लखनऊ, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में एसआईआर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2026 को लेकर उठ रहे प्रश्नों के बीच राज्य सरकार ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। उत्तर प्रदेश के मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस समस्त प्रक्रिया का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर चुनाव आयोग की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करना है।
इस संदर्भ में मंत्री ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत फर्जी, अयोग्य, मृत या दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और कुल मिलाकर लगभग 2.89 करोड़ नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सुधार के लिए पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी प्रावधान मौजूद हैं तथा जिन वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, वे दोबारा अपने नाम जोड़वा सकते हैं।
जयवीर सिंह ने बताया कि बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) जमीनी स्तर पर जाकर मतदाता सूचियों की जांच करेंगे और हर योग्य नागरिक को वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इनका मकसद केवल संवैधानिक संस्था, यानी चुनाव आयोग, को कमजोर करना है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि एसआईआर का उद्देश्य सिर्फ एक साफ-सुथरी, भरोसेमंद और त्रुटिरहित वोटर लिस्ट तैयार करना है और इसमें सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों को सहयोग करना चाहिए।
दिल्ली की एक मस्जिद के पास चलाए गए तोड़फोड़ अभियान के दौरान पुलिस पर हुए पथराव को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री जयवीर सिंह ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस घटना में चाहे कोई भी शामिल हो, सरकार कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा और जो भी व्यक्ति सरकारी काम में बाधा डालेगा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और शांति व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जयवीर सिंह ने जेएनयू परिसर में लगाए गए विवादित नारों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस तरह की नारेबाजी जेएनयू कैंपस में की गई, उसे कोई भी देश, समाज या सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसी एक राजनीतिक पार्टी के नहीं, बल्कि देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री होते हैं और उसी तरह मुख्यमंत्री भी हर नागरिक के होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का अपमान देश का अपमान है। इस तरह की अभद्र भाषा और टिप्पणियां किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं और समाज को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
बिहार के मधुबनी में कांग्रेस कार्यालय के भीतर प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच लाठी-डंडे चलने की घटना पर भी मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के पास अब जमीन पर कुछ भी बचा नहीं है और आंतरिक कलह उसकी कमजोर स्थिति को उजागर कर रही है। बिहार की जनता ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को सीधे तौर पर नकार दिया है, और ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि पार्टी संगठन के भीतर भी हालात पूरी तरह से बिखरे हुए हैं।