बिहार: सीतामढ़ी में कथित तांत्रिक इलाज का भंडाफोड़, श्रवण महतो गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार पुलिस ने 7 अक्टूबर 2026 को सीतामढ़ी जिले के परिहार ब्लॉक के महादेवपट्टी गाँव से श्रवण महतो उर्फ श्रवण भगत को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि वह चिकित्सा उपचार के नाम पर बच्चों के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार करता था। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद सामने आया, जिसकी स्वतंत्र रूप से अभी पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
वायरल वीडियो में कथित तौर पर श्रवण महतो को बच्चों को पकड़कर हिलाते, उनके पैरों से उठाते और जमीन पर फेंकते हुए दिखाया गया है। वीडियो वायरल होते ही जनता में तीव्र आक्रोश फैल गया, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, जब अधिकारी पहली बार मौके पर पहुँचे तो आरोपी फरार हो गया, लेकिन बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। परिहार थाना अधिकारी पंकज कुमार यादव के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।
आरोपी के दावे
पूछताछ के दौरान श्रवण महतो ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह देवी कामाख्या और भगवान नरसिम्हा का आह्वान करते हुए पवित्र चावल के दाने (अक्षत) का वितरण करता था। उसने दावा किया कि यह ज्ञान उसे किसी ने नहीं सिखाया, बल्कि यह उसे स्वप्न के माध्यम से प्राप्त हुआ था।
आरोपी ने यह भी दावा किया कि नेपाल और ऑस्ट्रेलिया तक से लोग उसके पास इलाज के लिए आते थे और वह लगभग एक दशक से इस तरह के अनुष्ठान कर रहा था। उसने यह भी कहा कि इस दौरान किसी भी बच्चे की मृत्यु नहीं हुई। गौरतलब है कि ये सभी बयान जाँच का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय परिप्रेक्ष्य
स्थानीय निवासियों के अनुसार, श्रवण महतो पिछले लगभग चार वर्षों से महादेवपट्टी के एक श्मशान घाट परिसर में झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र के अनुष्ठान करता आ रहा था। स्थानीय लोगों का दावा है कि बोलने व चलने-फिरने में कठिनाई और अन्य शारीरिक बीमारियों के इलाज के लिए विशेष रूप से सोमवार और शुक्रवार को बच्चों को वहाँ लाया जाता था।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में अंधविश्वास और कथित तांत्रिक प्रथाओं के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की मांग लगातार उठ रही है। आलोचकों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन को ऐसी गतिविधियों पर पहले से निगरानी रखनी चाहिए थी।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच की स्थिति
एएसपी आशीष आनंद ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूरे मामले की विस्तृत जाँच जारी है। उन्होंने कहा, 'हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों को उस स्थान पर कौन लाया था, कथित प्रथाएँ कितने समय से चल रही थीं और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे।'
जाँचकर्ता वायरल वीडियो, आरोपी के बयानों और स्थानीय निवासियों से प्राप्त जानकारी की जाँच कर घटनाक्रम का पूरा विवरण स्थापित करने और संभावित सह-आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं। वीडियो में दिखाए गए लोगों की पहचान और उसका पूरा संदर्भ अभी तक स्थापित नहीं हो पाया है।
आगे की राह
इस मामले ने बाल संरक्षण और कथित अंधविश्वास-आधारित प्रथाओं पर स्थानीय प्रशासन की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जाँच के नतीजे और न्यायालय में आरोप तय होने के बाद मामले की दिशा स्पष्ट होगी।