क्या किशनगंज के 15 साल के लड़के के शोषण पर एनएचआरसी का संज्ञान लेना महत्वपूर्ण है?

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क्या किशनगंज के 15 साल के लड़के के शोषण पर एनएचआरसी का संज्ञान लेना महत्वपूर्ण है?

सारांश

क्या किशनगंज के 15 वर्षीय लड़के के साथ हुए बंधुआ मजदूरी के मामले पर एनएचआरसी का संज्ञान लेना सही है? इस घटना ने मानवाधिकारों के उल्लंघन की गंभीरता को उजागर किया है। जानिए इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्य बातें

15 साल का लड़का बंधुआ मजदूरी का शिकार बना।
एनएचआरसी ने स्वतः संज्ञान लिया है।
लड़के को चिकित्सा सहायता नहीं मिली।
रिपोर्ट के अनुसार, उसके लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ।
सरकारी अधिकारियों से विवरण मांगा गया है।

नई दिल्ली, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के किशनगंज जिले का 15 साल का एक लड़का लगभग आठ महीने तक बंधुआ मजदूरी का शिकार बना रहा। यह घटना हरियाणा के बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन से प्रारंभ हुई, जब लड़का अपने पिता से बिछड़ गया था।

सूत्रों से पता चलता है कि लड़का ट्रेन से उतरकर पानी लेने गया था, लेकिन भारी भीड़ के कारण वह फिर से ट्रेन में चढ़ नहीं पाया। इस दौरान ट्रेन छूट गई और वह अपने पिता से दूर हो गया। उसके बाद उसकी ज़िंदगी में कठिनाइयों का आगाज़ हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक व्यक्ति ने उसे नौकरी देने के बहाने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा में ले जाकर बंधुआ मजदूरी कराई।

लड़के को सुबह से लेकर रात तक काम करना पड़ता था। उसे गाय चराने और चारा काटने जैसे कामों के लिए मजबूर किया गया और उसे अक्सर शारीरिक रूप से पीटा

कुछ अजनबी लोगों ने उसे हरियाणा के नूंह जिले के एक अस्पताल में पहुंचाया, लेकिन डर के कारण वह वहां से भाग निकला और लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर कहीं पहुंचा। अंततः दो सरकारी शिक्षकों ने उसे देखा और इस घटना की जानकारी जीआरपी बहादुरगढ़, हरियाणा को दी। लड़का अंततः अगस्त 2025 में अपने घर किशनगंज, बिहार लौट सका।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बंधुआ मजदूरी से मुक्ति के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र अभी तक जारी नहीं हुआ है। ये दस्तावेज़ सरकारी पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया के लिए जरूरी हैं, जो केंद्रीय क्षेत्रीय योजना 'बंधनमुक्ति पुनर्वास योजना-2021' के अंतर्गत आता है।

एनएचआरसी ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट सत्य है, तो यह एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की घटना है। इसलिए आयोग ने हरियाणा के मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर और बिहार के किशनगंज के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। इन अधिकारियों से दो हफ्तों के अंदर पूरा विवरण मांगा गया है।

साथ ही आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या लड़के को कोई मुआवजा मिला और क्या उसके लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी हुआ है, ताकि वह दिव्यांगता अधिनियम, 2016 के तहत मिलने वाले लाभ उठा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या किशनगंज के लड़के को मुआवजा मिला?
अभी तक किशनगंज के लड़के को कोई मुआवजा नहीं मिला है।
एनएचआरसी ने इस मामले पर क्या कार्रवाई की?
एनएचआरसी ने हरियाणा के मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
इस मामले में बंधुआ मजदूरी का प्रमाणपत्र क्यों जरूरी है?
यह प्रमाणपत्र पुनर्वास और मुआवजे के लिए आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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