ओडिशा: आदिवासी व्यक्ति बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा, एनएचआरसी ने क्योंझर कलेक्टर और एसपी को जांच के निर्देश दिए
सारांश
Key Takeaways
- जीतू मुंडा (42 वर्ष), डियानाली गांव, क्योंझर, 27 अप्रैल 2026 को दिवंगत बहन कलारा मुंडा के कंकाल के साथ ओडिशा ग्रामीण बैंक, मल्लिपाशी शाखा पहुंचे।
- बैंक अधिकारियों ने खाताधारक की 'शारीरिक उपस्थिति' की माँग करते हुए लेनदेन से मना कर दिया था।
- एनएचआरसी ने 28 अप्रैल 2026 को मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज जेना की याचिका पर संज्ञान लिया।
- क्योंझर जिला कलेक्टर और एसपी को एक सप्ताह के भीतर एटीआर प्रस्तुत करने का निर्देश।
- ओडिशा ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष को भी सात दिनों में अलग एटीआर देने का आदेश।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने ओडिशा के क्योंझर जिले की एक झकझोर देने वाली घटना का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें एक 42 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा अपनी दिवंगत बहन के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए उसके कंकाल के अवशेष कब्र से निकालकर बैंक शाखा तक ले गए। 29 अप्रैल 2026 को आयोग ने क्योंझर के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
घटना का पूरा घटनाक्रम
27 अप्रैल 2026 को क्योंझर जिले के पटना पुलिस थाना क्षेत्र के डियानाली गांव के निवासी जीतू मुंडा ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लिपाशी शाखा में अपनी दिवंगत बहन कलारा मुंडा के खाते से पैसे निकालने पहुंचे थे। कलारा मुंडा का हाल ही में निधन हो गया था और उनका कोई कानूनी वारिस नहीं था।
प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज जेना ने बताया कि बैंक अधिकारियों ने जीतू मुंडा को यह कहते हुए मना कर दिया कि खाताधारक की 'शारीरिक उपस्थिति' अनिवार्य है। जेना के अनुसार,