26 जून 2026
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ओडिशा: आदिवासी व्यक्ति बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा, एनएचआरसी ने क्योंझर कलेक्टर और एसपी को जांच के निर्देश दिए

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ओडिशा: आदिवासी व्यक्ति बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा, एनएचआरसी ने क्योंझर कलेक्टर और एसपी को जांच के निर्देश दिए

सारांश

क्योंझर में एक आदिवासी व्यक्ति को बैंक से पैसे निकालने के लिए अपनी मृत बहन के कंकाल को कब्र से निकालना पड़ा — यह घटना बैंकिंग नौकरशाही की संवेदनहीनता और आदिवासी समुदायों के साथ व्यवस्थागत उपेक्षा की कड़वी तस्वीर है। एनएचआरसी ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना है।

मुख्य बातें

जीतू मुंडा (42 वर्ष), डियानाली गांव, क्योंझर , 27 अप्रैल 2026 को दिवंगत बहन कलारा मुंडा के कंकाल के साथ ओडिशा ग्रामीण बैंक, मल्लिपाशी शाखा पहुंचे।
बैंक अधिकारियों ने खाताधारक की 'शारीरिक उपस्थिति' की माँग करते हुए लेनदेन से मना कर दिया था।
एनएचआरसी ने 28 अप्रैल 2026 को मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज जेना की याचिका पर संज्ञान लिया।
क्योंझर जिला कलेक्टर और एसपी को एक सप्ताह के भीतर एटीआर प्रस्तुत करने का निर्देश।
ओडिशा ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष को भी सात दिनों में अलग एटीआर देने का आदेश।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने ओडिशा के क्योंझर जिले की एक झकझोर देने वाली घटना का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें एक 42 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा अपनी दिवंगत बहन के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए उसके कंकाल के अवशेष कब्र से निकालकर बैंक शाखा तक ले गए। 29 अप्रैल 2026 को आयोग ने क्योंझर के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

घटना का पूरा घटनाक्रम

27 अप्रैल 2026 को क्योंझर जिले के पटना पुलिस थाना क्षेत्र के डियानाली गांव के निवासी जीतू मुंडा ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लिपाशी शाखा में अपनी दिवंगत बहन कलारा मुंडा के खाते से पैसे निकालने पहुंचे थे। कलारा मुंडा का हाल ही में निधन हो गया था और उनका कोई कानूनी वारिस नहीं था।

प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज जेना ने बताया कि बैंक अधिकारियों ने जीतू मुंडा को यह कहते हुए मना कर दिया कि खाताधारक की 'शारीरिक उपस्थिति' अनिवार्य है। जेना के अनुसार,

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक व्यवस्थागत विफलता का प्रतिबिंब है जो आदिवासी और हाशिये के समुदायों को बुनियादी वित्तीय सेवाओं से दूर रखती है। बैंक अधिकारियों द्वारा 'शारीरिक उपस्थिति' की अड़ियल माँग न केवल मानवीय संवेदनहीनता है, बल्कि RBI के समावेशी बैंकिंग दिशानिर्देशों की भी अनदेखी है। एनएचआरसी का हस्तक्षेप स्वागतयोग्य है, परंतु असली सवाल यह है कि एटीआर दाखिल होने के बाद जवाबदेही सुनिश्चित होगी या यह भी फाइलों में दब जाएगा। आदिवासी समुदायों के लिए वित्तीय समावेश की घोषणाएँ तब तक खोखली हैं जब तक ज़मीनी स्तर पर बैंक कर्मचारियों को संवेदनशीलता प्रशिक्षण और स्पष्ट प्रोटोकॉल नहीं मिलते।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्योंझर में आदिवासी व्यक्ति बहन का कंकाल बैंक क्यों ले गया?
क्योंझर के डियानाली गांव के जीतू मुंडा अपनी दिवंगत बहन कलारा मुंडा के बैंक खाते से पैसे निकालने ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लिपाशी शाखा गए थे। बैंक अधिकारियों ने खाताधारक की 'शारीरिक उपस्थिति' अनिवार्य बताते हुए मना कर दिया, जिससे व्यथित होकर उन्होंने बहन के दफन अवशेष कब्र से निकालकर बैंक में प्रस्तुत किए।
एनएचआरसी ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 28 अप्रैल 2026 को मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज जेना की याचिका पर संज्ञान लेते हुए क्योंझर के जिला कलेक्टर और एसपी को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। ओडिशा ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष को भी सात दिनों में अलग एटीआर देने का आदेश दिया गया है।
एनएचआरसी ने इस घटना को मानवाधिकार उल्लंघन क्यों माना?
आयोग ने पाया कि इस घटना से जीतू मुंडा को अत्यधिक मानसिक और भावनात्मक पीड़ा हुई, जो गरिमापूर्ण जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। आयोग ने यह भी कहा कि बैंक अधिकारियों की कार्रवाई मृतक के अधिकारों का भी अनादर करती है और आदिवासी समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों को कमज़ोर करती है।
इस मामले में याचिका किसने दायर की और कब?
प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज जेना ने 28 अप्रैल 2026 को एनएचआरसी में याचिका दायर की। उन्होंने अपनी शिकायत में मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन और प्रशासनिक असंवेदनशीलता के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की माँग की थी।
ओडिशा ग्रामीण बैंक को क्या निर्देश दिए गए हैं?
एनएचआरसी ने ओडिशा ग्रामीण बैंक, भुवनेश्वर के अध्यक्ष को सात दिनों के भीतर इस मामले पर उचित कार्रवाई करते हुए एक अलग कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) आयोग को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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