चुनावों के दौरान सोशल मीडिया के उपयोग पर आयोग के सख्त निर्देश, भ्रामक सामग्री पर त्वरित कार्रवाई

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चुनावों के दौरान सोशल मीडिया के उपयोग पर आयोग के सख्त निर्देश, भ्रामक सामग्री पर त्वरित कार्रवाई

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावों के दौरान सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी सामग्री के खिलाफ सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है। सभी राजनीतिक दलों को उचित और नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। जानिए क्या हैं आयोग के नए निर्देश और उनके प्रभाव।

Key Takeaways

  • सोशल मीडिया का जिम्मेदार उपयोग अनिवार्य है।
  • भ्रामक सामग्री पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
  • राजनीतिक दलों को पारदर्शिता बनाए रखनी होगी।
  • शिकायतें दर्ज करने के लिए सी-विजिल मॉड्यूल का उपयोग किया जा सकता है।
  • निर्वाचन आयोग द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावों और उपचुनावों के दौरान सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अफवाहें फैलाने वाले तथा फर्जी सामग्री साझा करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। आयोग ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदार और नैतिक रूप से उपयोग करना चाहिए। उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000, आईटी नियम 2021 एवं आदर्श आचार संहिता का पूर्णतः पालन करना अनिवार्य है।

आयोग ने यह भी निर्देशित किया है कि यदि कोई गुमराह करने वाला या गैर-कानूनी एआई द्वारा निर्मित या संशोधित सामग्री सामने आती है, तो उस पर तीन घंटे के भीतर कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव प्रचार में उपयोग की जाने वाली कोई भी कृत्रिम रूप से बनाई गई या एआई द्वारा संशोधित सामग्री स्पष्ट रूप से 'एआई जनरेटेड', 'डिजिटली एनहांस्ड' या 'सिंथेटिक कंटेंट' के रूप में अंकित की जाए। इसके साथ ही, पारदर्शिता और मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए यह भी बताना होगा कि यह सामग्री किसने बनाई है।

चुनाव आयोग ने कहा है कि विधानसभा चुनावों के दौरान सोशल मीडिया सामग्री की निगरानी की जा रही है और उल्लंघनों पर कार्रवाई की जा रही है। ऐसे कंटेंट में चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले पोस्ट, कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाले या बिगड़ने की क्षमता रखने वाले पोस्ट और मतदान प्रक्रिया या मशीनरी के खिलाफ झूठी बातें फैलाने वाले पोस्ट शामिल हैं।

इन पर आईटी अधिनियम के तहत अधिसूचित संबंधित राज्य आईटी नोडल अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जा रही है। 15 मार्च 2026 को चुनावों की घोषणा के बाद से 11,000 से अधिक ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट और यूआरएल की पहचान की गई है और उन पर कार्रवाई की गई है। इन कार्रवाइयों में सामग्री को हटाना, एफआईआर दर्ज करना, स्पष्टीकरण मांगना और खंडन जारी करना शामिल है।

आयोग ने 'लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 126 के तहत दिए गए प्रावधानों को भी दोहराया है। ये प्रावधान मतदान समाप्त होने से पहले के 48 घंटों में मतदान क्षेत्रों में किसी भी चुनावी सामग्री के प्रदर्शन पर रोक लगाते हैं। मीडिया प्लेटफॉर्म, टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया को इन प्रावधानों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है।

इसके अतिरिक्त, नागरिक, राजनीतिक दल और उम्मीदवार ईसीआईनेट पर उपलब्ध 'सी-विजिल मॉड्यूल' का उपयोग करके चुनाव आचार संहिता के उल्लंघनों की रिपोर्ट कर सकते हैं। 15 मार्च से 19 अप्रैल तक सी-विजिल ऐप का उपयोग करते हुए 3,23,099 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 3,10,393 शिकायतें, यानी 96.01 प्रतिशत शिकायतें 100 मिनट की निर्धारित समय सीमा के भीतर सुलझा दी गईं।

Point of View

जिससे मतदाता का विश्वास बढ़ेगा।
NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं?
भारत निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि भ्रामक या फर्जी सामग्री पर तीन घंटे के भीतर कार्रवाई की जाएगी।
क्या राजनीतिक दलों को सोशल मीडिया का उपयोग करने के लिए कोई दिशा-निर्देश दिए गए हैं?
हां, सभी राजनीतिक दलों को सोशल मीडिया का जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल करना अनिवार्य है।
क्या गुमराह करने वाली सामग्री पर कार्रवाई की जाएगी?
जी हां, यदि कोई गुमराह करने वाली या गैर-कानूनी सामग्री मिलती है, तो उस पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
क्या शिकायतें दर्ज करने के लिए कोई प्लेटफॉर्म उपलब्ध है?
हां, नागरिक और राजनीतिक दल 'सी-विजिल मॉड्यूल' का उपयोग करके शिकायतें दर्ज कर सकते हैं।
आयोग ने चुनावी प्रचार के लिए सामग्री पर क्या निर्देश दिए हैं?
आयोग ने निर्देश दिया है कि चुनाव प्रचार में उपयोग की जाने वाली एआई द्वारा निर्मित सामग्री को स्पष्ट रूप से अंकित किया जाना चाहिए।
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