सोमेश्वर महादेव मंदिर: काशी की प्राचीन धरोहर का अस्तित्व危機
सारांश
Key Takeaways
- सोमेश्वर महादेव मंदिर काशी का प्राचीन धार्मिक स्थल है।
- यह मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है।
- मंदिर की वर्तमान स्थिति जर्जर है।
- यह मंदिर सनातन धर्म का एक प्रमुख केंद्र रहा है।
- मंदिर में सफेद संगमरमर का शिवलिंग और अन्य मूर्तियाँ हैं।
वाराणसी, २७ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। दुनिया के प्राचीनतम जीवित शहरों में से एक वाराणसी, जिसे बनारस या काशी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह शहर उत्तर प्रदेश में गंगा के किनारे बसा हुआ है और इसे शिव की नगरी के रूप में भी जाना जाता है।
बनारस अपनी प्रसिद्ध 'काशी विश्वनाथ मंदिर' और भव्य गंगा आरती के लिए जाना जाता है, जो सुबह और शाम पारंपरिक तरीके से आयोजित की जाती है। यह शहर ज्ञान, आध्यात्मिकता, संगीत, संस्कृति और कला का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, और इसे अपने घाटों, साड़ियों और पान के लिए भी विश्वभर में पहचाना जाता है।
बनारस, जो सनातन संस्कृति का एक मुख्य केंद्र है, १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक 'काशी विश्वनाथ मंदिर' का घर है। यहाँ हर गली में एक मंदिर होने के कारण इसे 'मंदिरों का शहर' भी कहा जाता है।
वाराणसी के मंदिरों में से एक 'सोमेश्वर महादेव मंदिर' है, जो काशी के हृदय में स्थित एक प्राचीन, पवित्र और ऐतिहासिक शिव मंदिर है।
यह लगभग १००० साल पुराना सोमेश्वर महादेव मंदिर अब अपने अस्तित्व को खोने के कगार पर है। मंदिर की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है और वहाँ तक पहुँचने का रास्ता भी खतरनाक और खंडहरनुमा हो गया है। मंदिर की छत कभी भी गिर सकती है।
मान्यता है कि काशी का सोमेश्वर महादेव मंदिर कभी सनातन धर्म का एक प्रमुख प्रकाश केंद्र था, जहाँ महादेव के अनन्य उपासक ध्यान करने के लिए दूर-दूर से आते थे।
मंदिर में सफेद संगमरमर का शिवलिंग है, जिसके सामने नंदी की मूर्ति स्थापित है। इसके साथ ही, मंदिर में हनुमान जी का एक दुर्लभ स्वरूप भी है, जिनके कंधों पर राम और लक्ष्मण विराजमान हैं।
सोमेश्वर महादेव मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। लेकिन अब यह प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर समय के साथ नष्ट होते नजर आ रही है।