वरदराज पेरुमल मंदिर: भगवान विष्णु का जलवास और 2059 में भक्तों को मिलने वाले अद्वितीय दर्शन
सारांश
Key Takeaways
- कांचीपुरम का वरदराज पेरुमल मंदिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा जलवास पर है और इसे 2059 में निकाला जाएगा।
- मंदिर की स्थापना राजा कृष्ण वर्मा के समय हुई थी।
- मंदिर में छिपकलियाँ धन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- इस मंदिर की स्थापत्य कला इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विश्व के सात प्राचीनतम शहरों में से एक, तमिलनाडु का कांचीपुरम अपनी सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक आस्था के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
कांचीपुरम में लगभग 125 प्रमुख मंदिर हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना एक अद्वितीय इतिहास है। लेकिन एक ऐसा मंदिर है, जिसकी लोकप्रियता पिछले एक दशक में काफी बढ़ गई है। हम वरदराज पेरुमल मंदिर की बात कर रहे हैं।
यह मंदिर कांचीपुरम के शांत वातावरण में स्थित है और यह अन्य मंदिरों से बहुत अलग है। यहाँ भगवान विष्णु वरदराजा पेरुमल के रूप में अपनी पत्नी पेरुंदेवी थायर के साथ विराजमान हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना राजा कृष्ण वर्मा के शासनकाल में हुई थी, जिन्होंने थामिरबरानी नदी में स्नान करते समय एक पवित्र नीले पत्थर की मूर्ति की खोज की थी। इस मंदिर का इतिहास साहस और रक्षा की कहानियों से भरा हुआ है। कहा जाता है कि राजा कृष्णवर्मा के राज्य पर आक्रमण होने पर उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता मांगी थी, और दिव्य शक्तियों ने युद्ध में उनकी मदद की थी।
भगवान विष्णु की कृपा से राजा ने इस मंदिर का भव्य निर्माण कराया। यह मंदिर आकार और निर्माण शैली के कारण प्रसिद्ध है। भक्तों की आस्था भी मंदिर के गर्भगृह में मौजूद सोने और चांदी की छिपकलियों से जुड़ी हुई है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इन छिपकलियों के दर्शन से धन संबंधी समस्याएँ दूर होती हैं।
मंदिर की एक और खास बात यह है कि भगवान विष्णु की प्रतिमा वर्तमान में जलवास पर है। यह प्रतिमा अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनी है और पानी में वर्षों तक रहने के बावजूद इसकी संरचना में कोई परिवर्तन नहीं आता। इसे आखिरी बार 28 जून 2019 को आनंद सरस सरोवर से निकाला गया था, और अगली बार इसे 2059 में निकाला जाएगा। इस प्रतिमा को बिना किसी सुरक्षा लेप के जलवास दिया जाता है, और न तो यह फूलती है और न ही इसमें घुन लगता है। यही वजह है कि भक्तों की वरदराज पेरुमल के प्रति आस्था अधिक है।