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क्या सोमनाथ मंदिर हमारी आस्था और संस्कृति का प्रतीक है?: वीरेंद्र सचदेवा

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क्या सोमनाथ मंदिर हमारी आस्था और संस्कृति का प्रतीक है?: वीरेंद्र सचदेवा

सारांश

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया। इस आयोजन के माध्यम से उन्होंने सोमनाथ मंदिर की ऐतिहासिकता और आस्था की मजबूती पर जोर दिया। जानिए इस विशेष पर्व के महत्व के बारे में।

मुख्य बातें

सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था का प्रतीक है।
वीरेंद्र सचदेवा ने इसे सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक माना।
आक्रामकता के बावजूद भारतीय संस्कृति ने मजबूती दिखाई।
सिख गुरुओं के खिलाफ टिप्पणियों की आलोचना की गई।
राजनीतिक हस्तक्षेप पर सवाल उठाए गए।

नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने शनिवार को कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने पहले भगवान शिव के दर्शन किए और उसके बाद भगवान हनुमान के दर्शन किए।

उन्होंने कहा कि 1026 में सोमनाथ मंदिर पर विदेशी आक्रमणकारियों ने क्रूर हमला किया था, लेकिन बार-बार आक्रमण होने के बावजूद भारत की आस्था और सांस्कृतिक विरासत कभी कमजोर नहीं हुई। आज भी सोमनाथ मंदिर दुनिया के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है और यह हमारी आस्था की मजबूती का प्रतीक है।

वहीं, दूसरी ओर कपिल मिश्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि दिल्ली विधानसभा के अंदर हुई घटना के बावजूद पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। विधानसभा के अंदर नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा सिख गुरुओं के खिलाफ की गई टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक थी।

सचदेवा ने स्पष्ट किया कि विधानसभा के भीतर हुई किसी भी घटना पर कार्रवाई करने का अधिकार केवल विधानसभा अध्यक्ष को है। इस मामले में न तो पंजाब सरकार और न ही पंजाब पुलिस का कोई अधिकार क्षेत्र बनता है।

उन्होंने आम आदमी पार्टी और उसके प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सिख गुरुओं के खिलाफ की गई टिप्पणी के बाद आम आदमी पार्टी घबराई हुई नजर आ रही है और इसी दबाव में यह कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 'आप' इस मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही हैं।

बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को वीरेंद्र सचदेवा ने आतिशी की आलोचना करते हुए कहा था कि आतिशी ने शीतकालीन सत्र के बीच में पार्टी प्रचार के लिए गोवा जाकर विधानसभा का समय बर्बाद किया और सदन में उपस्थित होने के अपने संवैधानिक कर्तव्य का उल्लंघन किया।

सचदेवा ने कहा था कि अगर दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र का समय बर्बाद करने के लिए कोई जिम्मेदार है, तो वह विपक्ष की नेता आतिशी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। उनके विचार में, राजनीति से परे, इस मंदिर की ऐतिहासिकता को समझना और उसका सम्मान करना आवश्यक है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व इसलिए है क्योंकि यह भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। इसे बार-बार आक्रमण का सामना करना पड़ा, लेकिन इसकी धार्मिकता और आस्था कभी कमजोर नहीं हुई।
वीरेंद्र सचदेवा ने किस बारे में टिप्पणी की?
वीरेंद्र सचदेवा ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया और सिख गुरुओं के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की।
राष्ट्र प्रेस
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