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क्या सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में जामनगर के काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटों तक अखंड मंत्रोच्चारण हुआ?

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क्या सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में जामनगर के काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटों तक अखंड मंत्रोच्चारण हुआ?

सारांश

गुजरात के जामनगर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटों तक अखंड मंत्रोच्चारण का भव्य आयोजन हुआ है। यह कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रस्तुत कर रहा है।

मुख्य बातें

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन 8 से 11 जनवरी 2026 तक होगा।
इसमें 72 घंटे का अखंड मंत्रोच्चारण किया जा रहा है।
इस आयोजन का उद्देश्य भक्ति और सहिष्णुता का प्रचार करना है।
काशी विश्वनाथ मंदिर में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा।

गांधीनगर, 10 जनवरी (आईएएनएल)। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत गुजरात के जामनगर शहर के ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटों तक अखंड मंत्रोच्चारण का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया गया है। 10 जनवरी तक मंदिर में सत्संग, भजन, महाआरती और मंत्रोच्चारण सहित कई आयोजन किए गए हैं।

इस अनुष्ठान के दौरान विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सतत वैदिक मंत्रोच्चारण किया जा रहा है, जिससे समग्र मंदिर परिसर भक्ति, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत बना है। मंत्रोच्चारण के साथ-साथ हर दिन शाम को महाआरती का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उपस्थित रहकर श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। 'ओम नमः शिवाय' की धुन से सत्संग के दौरान समग्र वातावरण आध्यात्मिक बना।

सत्संग कार्यक्रम के आयोजन में विधायक दिव्येशभाई अकबरी, उप महापौर कृष्णाबेन सोढा, स्थायी समिति के अध्यक्ष नीलेशभाई कथगरा, अग्रणी बीनाबेन कोठारी, पार्षदगण आदि अग्रणी तथा भक्तगण उपस्थित रहकर सहभागी हुए।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन 8 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक एक राष्ट्रीय उत्सव के रूप में किया जा रहा है। यह आयोजन जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले अभिलिखित आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में स्मरणोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।

इस आयोजन की परिकल्पना विनाश के स्मरण के रूप में नहीं, बल्कि सहनशीलता, विश्वास और सभ्यतागत आत्म-सम्मान को श्रद्धांजलि के रूप में की गई है। सदियों से, सोमनाथ को बार-बार उन आक्रमणकारियों द्वारा निशाना बनाया गया जिनका उद्देश्य भक्ति के बजाय विनाश था। हालांकि, हर बार देवी अहिल्या बाई होल्कर जैसे भक्तों के सामूहिक संकल्प के माध्यम से मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। पुनरुद्धार के इस अटूट चक्र ने सोमनाथ को भारत की सभ्यतागत निरंतरता का एक शक्तिशाली प्रतीक बना दिया।

1026 का वर्ष उस समय के भी 75 साल पूरे होने का अवसर है, जब स्वतंत्रता के बाद 11 मई, 1951 को मौजूदा सोमनाथ मंदिर को भक्तों के लिए फिर से खोला गया था। ये दोनों अहम पड़ाव सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आधार बने हैं।

चार दिवसीय पर्व के दौरान, सोमनाथ आध्यात्मिक गतिविधियों, सांस्कृतिक चिंतन और राष्ट्रीय स्मरण के केंद्र में परिवर्तित हो गया है। इस उत्सव की एक मुख्य विशेषता 72 घंटे का अखंड ओंकार जाप है, जो एकता और सामूहिक विश्वास का प्रतीक है। इसके साथ ही, पूरे मंदिर परिसर और नगर में भक्ति संगीत, आध्यात्मिक विमर्श और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल भारतीय सभ्यता की गहराई को दर्शाता है, बल्कि इसे एकता और सहिष्णुता का प्रतीक भी माना जाता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की धरोहर को संजोने का एक प्रयास है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व कब मनाया जा रहा है?
यह पर्व 8 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक मनाया जा रहा है।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस आयोजन का उद्देश्य सहनशीलता, विश्वास और सभ्यतागत आत्म-सम्मान को श्रद्धांजलि देना है।
क्या इस कार्यक्रम में कोई विशिष्ट गतिविधियाँ हुईं?
हाँ, इस कार्यक्रम में 72 घंटे का अखंड ओंकार जाप और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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