क्या स्पीयर कॉर्प्स ने तिनसुकिया स्टेशन पर सबोटेज रोकने के लिए संयुक्त ड्रिल की?
सारांश
Key Takeaways
- सुरक्षा तैयारी को परखने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया।
- असम पुलिस, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और सिविल प्रशासन ने मिलकर कार्य किया।
- आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता को बढ़ाया गया।
- सुरक्षा के प्रति आम जनता का विश्वास बढ़ा है।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया।
नई दिल्ली, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना के स्पीयर कॉर्प्स के रेड शील्ड गनर्स ने शनिवार को असम के तिनसुकिया रेलवे स्टेशन पर एक संयुक्त एंटी-सबोटेज मॉक ड्रिल आयोजित की।
इस अभ्यास का मूल उद्देश्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को संभावित खतरों से बचाने की तैयारी को परखना था।
ड्रिल के दौरान सैनिकों ने सबोटेज या तोड़फोड़ की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, संकट प्रबंधन और सुरक्षा उपायों का अभ्यास किया। इसमें असम पुलिस, ग्रुप रेलवे पुलिस, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और सिविल प्रशासन के अधिकारियों ने भी सक्रिय भाग लिया।
इस ड्रिल ने सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और जॉइंट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर की पुष्टि की। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आपात स्थिति में विभिन्न विभाग कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से काम कर सकते हैं। रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त और संवेदनशील स्थान पर ऐसी तैयारी अत्यावश्यक है, क्योंकि यहाँ आतंकवादी घटनाएँ या सबोटेज की कोशिशें संभव हैं।
स्पीयर कॉर्प्स, जो पूर्वोत्तर में सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है, नियमित रूप से ऐसी मॉक ड्रिल करता है ताकि सैनिक और नागरिक एजेंसियां एक साथ मिलकर किसी भी खतरे का सामना कर सकें। रेड शील्ड गनर्स, जो स्पीयर कॉर्प्स की एक महत्वपूर्ण इकाई है, ने इस अभ्यास का संचालन किया।
यह ड्रिल गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों से पहले सुरक्षा को मजबूत करने का एक हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी संयुक्त तैयारी न केवल सैन्य तैयारियों को तेज करती है, बल्कि आम जनता में सुरक्षा के प्रति भरोसा भी बढ़ाती है। तिनसुकिया जैसे इलाके में, जहाँ रेलवे नेटवर्क महत्वपूर्ण है, ऐसी ड्रिल से संभावित खतरों पर काबू पाने की क्षमता और मजबूत हुई है।
भारतीय सेना लगातार ऐसी गतिविधियों के जरिए पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। इस सफल मॉक ड्रिल से सभी शामिल विभागों की टीमवर्क और तत्परता की सराहना की जा रही है।