कोलकाता स्ट्रॉन्ग रूम विवाद: शाहनवाज हुसैन बोले — हार के डर से घबराई TMC, पश्चिम बंगाल में बनेगी BJP सरकार
सारांश
Key Takeaways
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन ने 1 मई 2026 को पटना में राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कोलकाता के स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर हुए हंगामे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला। हुसैन ने दावा किया कि TMC हार के डर से घबराई हुई है और इसीलिए उसके नेता स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश एग्जिट पोल BJP के पक्ष में हैं और पश्चिम बंगाल में भारी बहुमत से BJP की सरकार बनेगी।
मुख्य घटनाक्रम
कोलकाता में मतगणना से पहले स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर TMC नेताओं की कथित उपस्थिति और हंगामे ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। BJP प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि जनता अपना फैसला पहले ही सुना चुकी है और BJP पूरी ताकत के साथ सत्ता में आने जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब-जब चुनाव आयोग (ECI) ने TMC नेताओं को बुलाया, वे उपस्थित नहीं हुए, जबकि BJP ने हर मंच पर बेहतर प्रदर्शन किया है।
चुनाव आयोग पर भरोसा, TMC पर आरोप
हुसैन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर पूर्ण भरोसा जताते हुए कहा कि आयोग ने निष्पक्ष चुनाव कराए हैं। उनके अनुसार, TMC पहले से ही अपनी संभावित हार का ठीकरा आयोग पर फोड़ने की तैयारी में है। यह ऐसे समय में आया है जब मतगणना से ठीक पहले स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर विपक्षी दलों की सक्रियता असामान्य रूप से बढ़ी है।
बिहार BJP का भी तीखा प्रहार
बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी TMC की इस गतिविधि को "हताशा का परिणाम" करार दिया। उन्होंने कहा कि TMC को यह एहसास हो चुका है कि वह भवानीपुर जैसी महत्वपूर्ण सीट भी हार सकती है। सरावगी ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर (RO) और अन्य राजनीतिक दलों की मौजूदगी में जो गतिविधियाँ की जा रही हैं, वे चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन करती हैं।
स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा व्यवस्था
सरावगी ने स्पष्ट किया कि स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सुरक्षित होते हैं — CCTV कैमरों से निगरानी की जाती है और बिना अनुमति किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं होती। इसके बावजूद अंदर जाने की कोशिशें स्पष्ट रूप से नियमों के विरुद्ध हैं। गौरतलब है कि स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की सेंध लगाने का प्रयास चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल
सरावगी ने पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर भी निशाना साधा और कहा कि पिछले 15 वर्षों में राज्य ने "महा जंगल राज" का अनुभव किया है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। अब देखना यह होगा कि मतगणना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीतिक तस्वीर किस करवट बैठती है।