सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल चुनाव मामला: ममता बनर्जी के भाषण पर उठे सवाल
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल चुनाव मामले पर गंभीर विचार किया।
- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भाषण पर सवाल उठाए गए।
- राज्य की मशीनरी की विफलता पर चर्चा हुई।
- चुनाव आयोग के वकील ने माहौल बिगड़ने की चिंता जताई।
- सीजेआई ने केंद्रीय बलों के उपयोग पर स्पष्टीकरण दिया।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल के चुनाव से संबंधित मामले की सुनवाई में चुनाव आयोग के वकील ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक विवादास्पद भाषण का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि उत्तर प्रदेश से सीआरपीएफ की एक फोर्स उनके खिलाफ कार्रवाई करने आ रही है, इसलिए उन्हें सतर्क रहना चाहिए। इस भाषण से संबंधित वीडियो भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
अधिवक्ता एसजी तुषार मेहता ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव का मामला फिर से उठाया। उन्होंने बताया कि एक महिला जज ने एक पत्रकार से बातचीत के दौरान अपने जीवन को खतरे में बताया और कहा कि यदि उन्हें कुछ होता है तो उनके बच्चों का ध्यान रखा जाए। इस घटना की जानकारी देते हुए उन्होंने न्यायालय का ध्यान इस ओर खींचा।
चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से मात्र माहौल बिगड़ता है और स्थिति और भी विषम हो जाती है।
वहीं, टीएमसी के नेता और वरिष्ठ वकील कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा कि एक विपक्षी उम्मीदवार अपने भाषण में मुख्यमंत्री की हत्या की बात कर रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को भी न्यायालय में उठाया।
मुख्य न्यायाधीश सीजेआई ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यदि राज्य की मशीनरी पूरी तरह से विफल होती है, तो न्यायालय उचित कदम उठाने पर विचार करेगा। लेकिन, पश्चिम बंगाल में पहले की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
यह सुनवाई पश्चिम बंगाल में चुनावी वातावरण और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित है। न्यायालय सभी पक्षों की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुन रहा है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।