तमिलनाडु में 4,233 ओमनी बसों की जांच, 778 पर चालान; त्योहारी सीजन में अधिक किराए पर कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु परिवहन विभाग ने 15 से 17 अक्टूबर 2026 के बीच राज्यव्यापी प्रवर्तन अभियान चलाते हुए 4,233 ओमनी बसों की जांच की और 778 बसों में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर निरीक्षण रिपोर्ट जारी करते हुए इलेक्ट्रॉनिक चालान काटे। यह कार्रवाई आयुध पूजा और विजयादशमी की छुट्टियों के दौरान कुछ निजी बस ऑपरेटरों द्वारा यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूले जाने की शिकायतों के बाद शुरू की गई। परिवहन मंत्री विजय तमिलन पार्थिपन के निर्देश पर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों और मोटर वाहन निरीक्षकों की टीमों ने पूरे तमिलनाडु में यह सघन जांच अभियान चलाया।
अभियान का दायरा और आंकड़े
विभाग के आँकड़ों के अनुसार, तीन दिनों की इस जांच में जिन बसों की निरीक्षण की गई उनमें से 18 प्रतिशत से अधिक में किसी न किसी रूप में नियमों का उल्लंघन पाया गया। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों ने जहाँ भी अनियमितताएँ पकड़ी गईं, वहाँ तत्काल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की गई और ई-चालान जारी करते हुए उचित कार्रवाई आरंभ की गई। यह अभियान चेन्नई सहित तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में एक साथ चलाया गया।
त्योहारी भीड़ और यात्रियों की परेशानी
आयुध पूजा और विजयादशमी के अवसर पर चेन्नई से अपने गृहनगरों की ओर लौटने वाले यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई। सरकारी बसों, ट्रेनों के साथ-साथ ओमनी बसें भी इस मौसमी यातायात का एक अहम हिस्सा हैं। यात्रियों की बढ़ती मांग के बीच, कुछ निजी ऑपरेटरों द्वारा सीटों की कमी का फायदा उठाते हुए मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद विभाग को यह कदम उठाना पड़ा।
क्या है अभी भी अस्पष्ट
विभाग के आधिकारिक बयान में उल्लंघनों का विस्तृत वर्गीकरण नहीं दिया गया है। 778 बसों में से कितनी बसों पर विशेष रूप से अधिक किराया वसूलने का आरोप था, यह स्पष्ट नहीं किया गया। इसके अलावा, कुल कितना जुर्माना लगाया गया और क्या प्रभावित यात्रियों को अतिरिक्त किराए की वापसी (रिफंड) मिली — इन सवालों का जवाब अभी भी बाकी है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
परिवहन मंत्री विजय तमिलन पार्थिपन के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान से स्पष्ट है कि विभाग त्योहारी सीजन में निजी बस सेवाओं पर निगरानी बढ़ाने के प्रति सचेत है। गौरतलब है कि त्योहारों के दौरान यात्रा का सिलसिला अभी भी जारी है और लाखों यात्री इन्हीं परिवहन सेवाओं पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चालान काटने से दीर्घकालिक सुधार नहीं होगा — किराया नियंत्रण के लिए एक ठोस नियामक ढाँचे और डिजिटल किराया प्रदर्शन (fare display) की अनिवार्यता जरूरी है। आने वाले त्योहारी मौसमों में यह देखना होगा कि क्या यह एकबारगी अभियान एक स्थायी निगरानी तंत्र का रूप ले पाता है।