भाजपा सांसद तरुण चुघ का दिल्ली यूनिवर्सिटी में युवाओं को संदेश: 2047 तक विकसित भारत का संकल्प लें
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद तरुण चुघ ने 1 अक्टूबर 2026 को दिल्ली यूनिवर्सिटी के दयाल सिंह कॉलेज का दौरा किया और 'जेन-जी' पीढ़ी के छात्रों से सीधा संवाद किया। उन्होंने युवाओं से महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) की पूर्व संध्या पर आह्वान किया कि वे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
विचार गोष्ठी का मकसद
दयाल सिंह कॉलेज में आयोजित इस विचार गोष्ठी में मुख्य रूप से महात्मा गांधी के सिद्धांतों को आज के संदर्भ में कैसे आगे बढ़ाया जाए, इस पर चर्चा हुई। चुघ ने कहा कि भारत की आजादी के सौ साल 2047 में पूरे होंगे और इस मील के पत्थर तक पहुँचते-पहुँचते देश को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा करने की जिम्मेदारी इसी युवा पीढ़ी के कंधों पर है।
उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी के विकसित भारत के संकल्प के लिए हर नौजवान को साकार करने में जिम्मेदार बनना है।' यह ऐसे समय में आया है जब 2 अक्टूबर को पूरे देश में गांधी जयंती के उपलक्ष्य में स्वच्छता अभियान और संकल्प-कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
स्वच्छता — एक आंदोलन
तरुण चुघ ने कहा कि महात्मा गांधी ने नागरिक कर्तव्यों में स्वच्छता को सर्वोच्च स्थान दिया था। उन्होंने कहा, 'स्वच्छता केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है।' उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के बाद देश के हर नागरिक को गांधी जी के इसी सिद्धांत से प्रेरित किया है। गौरतलब है कि स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को गांधी जयंती पर ही हुई थी।
दिल्ली में चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान की सराहना करते हुए चुघ ने कहा कि देश के युवाओं ने इस अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती दी है।
युवाओं की भूमिका पर जोर
भाजपा सांसद ने कहा कि आज देश के युवा हर क्षेत्र में — चाहे वह तकनीक हो, उद्यमिता हो या सामाजिक सेवा — भारत को आगे ले जाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी के नेतृत्व में आज भारत की चमक और धमक स्पष्ट रूप से दिख रही है।' उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना युवाओं की मेहनत और गांधीजी के आदर्शों के संयोजन से ही पूरा होगा।
आगे क्या
2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर देशभर में स्वच्छ भारत दिवस मनाया जाएगा और इस तरह के युवा-केंद्रित कार्यक्रम आगे भी जारी रहने की संभावना है। दयाल सिंह कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में इस तरह की विचार गोष्ठियाँ युवाओं को राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने के प्रयासों का हिस्सा हैं।