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आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने 77वें टीबी सील बिक्री अभियान का शुभारंभ किया

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आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने 77वें टीबी सील बिक्री अभियान का शुभारंभ किया

सारांश

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने विजयवाड़ा में 77वें टीबी सील बिक्री अभियान का शुभारंभ किया और कहा कि टीबी केवल चिकित्सा नहीं, एक सामाजिक-आर्थिक चुनौती है। उन्होंने 2030 के वैश्विक लक्ष्य से पहले भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।

मुख्य बातें

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस.
अब्दुल नजीर ने 7 अक्टूबर 2026 को विजयवाड़ा के लोक भवन में 77वें टीबी सील बिक्री अभियान का शुभारंभ किया।
राज्यपाल ने कहा कि 144 वर्ष पहले सर रॉबर्ट कोच ने टीबी के जीवाणु की खोज की, फिर भी यह बीमारी जानलेवा बनी हुई है।
केंद्र सरकार का ' टीबी मुक्त भारत अभियान ' संयुक्त राष्ट्र के 2030 के एसडीजी लक्ष्य से पहले टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखता है।
राज्यपाल ने नागरिकों, उद्योगों, कॉर्पोरेट घरानों और स्वयंसेवी संगठनों से अभियान में उदार सहयोग की अपील की।
कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश टीबी एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी और राज्यपाल सचिवालय के अधिकारी उपस्थित रहे।

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और आंध्र प्रदेश टीबी एसोसिएशन के अध्यक्ष एस. अब्दुल नजीर ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को विजयवाड़ा स्थित लोक भवन के दरबार हॉल में 77वें टीबी सील बिक्री अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। इस आयोजन में चिकित्सा, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

राज्यपाल का संबोधन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल अब्दुल नजीर ने कहा कि आज से 144 वर्ष पूर्व सर रॉबर्ट कोच ने तपेदिक (टीबी) फैलाने वाले जीवाणु की पहचान की थी। उन्होंने रेखांकित किया कि चिकित्सा विज्ञान में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद टीबी आज भी एक जानलेवा बीमारी बनी हुई है। राज्यपाल ने कहा कि टीबी केवल एक चिकित्सीय चुनौती नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्या है जो व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों — सभी को प्रभावित करती है।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि टीबी के विरुद्ध प्रभावी लड़ाई के लिए केवल उपचार पर्याप्त नहीं है। इसमें जागरूकता, शीघ्र पहचान, रोकथाम, पोषण, सामाजिक सहयोग और सामुदायिक भागीदारी — सभी पहलुओं को एक साथ शामिल करना आवश्यक है।

टीबी मुक्त भारत अभियान की पृष्ठभूमि

राज्यपाल ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'टीबी मुक्त भारत अभियान' का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के 2030 के वैश्विक एसडीजी लक्ष्य से पहले ही भारत से टीबी का उन्मूलन करना है। गौरतलब है कि भारत विश्व में सर्वाधिक टीबी रोगियों वाले देशों में शुमार है, और यह अभियान सरकार तथा नागरिक समाज की संयुक्त जिम्मेदारी के सिद्धांत पर आधारित है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'निक्षय मित्र' जैसी योजनाओं के ज़रिये टीबी रोगियों को पोषण सहायता देने का प्रयास कर रही है, और राज्य सरकारें इस राष्ट्रीय प्रयास को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने में जुटी हैं।

टीबी सील बिक्री अभियान का महत्व

राज्यपाल ने 77वें टीबी सील बिक्री अभियान को जन-जागरूकता और जन-भागीदारी को एकसाथ जोड़ने वाला विशिष्ट कार्यक्रम बताया। उन्होंने नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, कॉर्पोरेट घरानों, स्वयंसेवी संगठनों और दानदाताओं से इस अभियान में उदारतापूर्वक सहयोग देने की अपील की।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख व्यक्ति

इस अवसर पर आंध्र प्रदेश टीबी एसोसिएशन के संरक्षक डॉ. अरुण कुमार कांति मोहंती और डॉ. पी.एस. शर्मा; उपाध्यक्ष डॉ. कोडली रामकृष्ण और डॉ. बी. मसीलामणि; महासचिव डॉ. पी. जयकर बाबू; संयुक्त निदेशक एवं मानद सचिव डॉ. टी. रमेश; राज्यपाल के संयुक्त सचिव पी.एस. सूर्य प्रकाश सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

आगे की राह

टीबी सील बिक्री अभियान से प्राप्त धनराशि आंध्र प्रदेश टीबी एसोसिएशन के माध्यम से टीबी नियंत्रण और जागरूकता कार्यक्रमों में लगाई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे जन-अभियानों की सफलता तभी सुनिश्चित होती है जब कॉर्पोरेट और नागरिक समाज की भागीदारी सरकारी प्रयासों के साथ कदम मिलाकर चले। भारत के 2025 तक टीबी उन्मूलन के संशोधित लक्ष्य के संदर्भ में यह अभियान और भी प्रासंगिक हो जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस तरह के जागरूकता-केंद्रित आयोजनों का ज़मीनी प्रभाव कितना मापने योग्य है। भारत अभी भी विश्व में सर्वाधिक टीबी रोगियों वाले देशों में है, और 2025 के उन्मूलन लक्ष्य को पहले ही संशोधित किया जा चुका है। कॉर्पोरेट और सामुदायिक भागीदारी की अपील तब तक अधूरी रहेगी जब तक पोषण सहायता और निदान तंत्र ग्रामीण स्तर तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुँचते। सील बिक्री से मिली धनराशि के उपयोग की पारदर्शी जवाबदेही इस अभियान को वास्तविक असर देने वाली कड़ी बन सकती है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

77वाँ टीबी सील बिक्री अभियान क्या है?
यह आंध्र प्रदेश टीबी एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक वार्षिक जन-जागरूकता और धन-संग्रह अभियान है जो टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों को सहयोग देता है। इस वर्ष इसका 77वाँ संस्करण 7 अक्टूबर 2026 को विजयवाड़ा के लोक भवन में राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर द्वारा शुरू किया गया।
टीबी मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य क्या है?
केंद्र सरकार का 'टीबी मुक्त भारत अभियान' संयुक्त राष्ट्र के 2030 के वैश्विक एसडीजी लक्ष्य से पहले भारत से तपेदिक का उन्मूलन करना चाहता है। इसमें सरकार और समाज दोनों की संयुक्त भागीदारी पर बल दिया गया है।
राज्यपाल अब्दुल नजीर ने किस बात पर ज़ोर दिया?
राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने कहा कि टीबी केवल चिकित्सीय नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। उन्होंने जागरूकता, शीघ्र पहचान, पोषण और सामुदायिक भागीदारी को उपचार के साथ जोड़ने की ज़रूरत पर बल दिया।
इस अभियान में कौन भाग ले सकता है?
राज्यपाल ने नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, कॉर्पोरेट घरानों, स्वयंसेवी संगठनों और दानदाताओं सभी से अपील की है कि वे टीबी सील बिक्री अभियान में उदारतापूर्वक सहयोग करें और इस सामाजिक पहल को मज़बूत बनाएँ।
सर रॉबर्ट कोच का टीबी से क्या संबंध है?
सर रॉबर्ट कोच ने 144 वर्ष पहले टीबी (तपेदिक) फैलाने वाले जीवाणु 'माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस' की खोज की थी, जो इस रोग की वैज्ञानिक समझ का आधार बनी। राज्यपाल नजीर ने इस ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि इतनी प्रगति के बावजूद टीबी आज भी जानलेवा बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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