टीबी-मुक्त केरल अभियान: कुडुम्बश्री के 45 लाख सदस्य बने जमीनी ताकत, 100 दिवसीय मुहिम तेज
सारांश
मुख्य बातें
केरल के टीबी-मुक्त अभियान को 24 जुलाई 2026 को जमीनी स्तर पर बड़ी मजबूती मिली, जब राज्य के विशाल महिला सामुदायिक नेटवर्क कुडुम्बश्री ने स्वास्थ्य विभाग के साथ औपचारिक साझेदारी की। तिरुवनंतपुरम में राज्य टीबी सेल द्वारा शुरू किए गए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत कुडुम्बश्री अधिकारियों को जागरूकता, शुरुआती पहचान और उपचार अनुपालन के लिए तैयार किया जा रहा है।
100 दिवसीय अभियान और कुडुम्बश्री की भूमिका
सरकार के 100 दिवसीय गहन तपेदिक उन्मूलन अभियान के अंतर्गत राज्य टीबी सेल ने कुडुम्बश्री कार्यकर्ताओं को आवश्यक स्वास्थ्य ज्ञान और संचार कौशल से लैस करना शुरू किया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, समुदायों में शुरुआती पहचान और समय पर उपचार ही तपेदिक के विरुद्ध सबसे प्रभावी उपाय हैं।
गाँवों और शहरी बस्तियों में कुडुम्बश्री की व्यापक उपस्थिति का लाभ उठाते हुए सरकार का लक्ष्य है कि लक्षणों वाले व्यक्तियों की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान हो, उन्हें जाँच के लिए प्रेरित किया जाए और निदान के बाद उपचार की निरंतरता सुनिश्चित की जाए।
प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया
प्रशिक्षण सत्र में कुडुम्बश्री अधिकारियों को तपेदिक के लक्षण, संक्रमण के तरीके, उपलब्ध नैदानिक सुविधाएँ, उपचार प्रोटोकॉल और स्वास्थ्य लाभ में पोषण की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया गया। इसके साथ ही टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने पर विशेष बल दिया गया, जो अक्सर निदान और उपचार में देरी का प्रमुख कारण बनता है।
प्रतिभागियों को टीबी मुक्त भारत मोबाइल एप्लिकेशन से भी परिचित कराया गया, जो राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम का समर्थन करता है और सामुदायिक भागीदारी को डिजिटल रूप से सशक्त बनाता है।
कुडुम्बश्री: एक परिचय
केरल सरकार द्वारा 1998 में स्थापित कुडुम्बश्री दुनिया के सबसे बड़े महिला स्वयं सहायता नेटवर्क में से एक है। इसमें स्थानीय समूहों के माध्यम से संगठित 45 लाख से अधिक सदस्य हैं। गरीबी उन्मूलन के अतिरिक्त यह नेटवर्क आजीविका सृजन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार ने 2025 तक देश को तपेदिक-मुक्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है और केरल उस दिशा में अग्रणी राज्यों में शामिल होने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय संगठनों की भागीदारी के बिना ऐसे स्वास्थ्य अभियान अपना पूरा असर नहीं दिखा पाते।
समुदाय का संकल्प और आगे की राह
प्रशिक्षण के समापन पर कुडुम्बश्री अधिकारियों ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाएँगी, लोगों को लक्षणों को नज़रअंदाज न करने के लिए प्रेरित करेंगी और चिकित्सा सहायता लेने में देरी न करने का संदेश घर-घर तक पहुँचाएँगी।
स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि हजारों स्थानीय समूहों और अभूतपूर्व जमीनी उपस्थिति के साथ कुडुम्बश्री इस अभियान का सबसे मजबूत सामुदायिक स्तंभ साबित हो सकती है। आने वाले हफ्तों में यह प्रशिक्षण राज्य के अन्य जिलों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है।