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क्या तीन तलाक खत्म होने से मुस्लिम महिलाओं को राहत मिली है: हसीन मस्तान?

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क्या तीन तलाक खत्म होने से मुस्लिम महिलाओं को राहत मिली है: हसीन मस्तान?

सारांश

हसीन मस्तान ने तीन तलाक के कानून के खत्म होने पर अपनी राय साझा की और इसे मुस्लिम महिलाओं के लिए राहत भरा कदम बताया। उन्होंने न्याय प्रणाली में अपने विश्वास का भी जिक्र किया। जानें उनके अनुभव और विचार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर।

मुख्य बातें

तीन तलाक का कानून मुस्लिम महिलाओं के लिए सुरक्षा प्रदान करता है।
हसीन मस्तान ने अपने अनुभवों से यह दिखाया कि न्यायपालिका पर विश्वास बेहद महत्वपूर्ण है।
सरकार के समर्थन से महिलाओं को इंसाफ मिल सकता है।
इस्लाम में गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कानून जरूरी है।
इंसानियत को प्राथमिकता देना सभी धर्मों से ऊपर है।

मुंबई, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान की बेटी हसीन मस्तान ने शनिवार को राष्ट्र प्रेस से बातचीत की। इस अवसर पर उन्होंने भारत सरकार द्वारा कानून बनाकर तीन तलाक को समाप्त करने की सराहना की। उन्होंने इसे मुस्लिम समुदाय के लिए लाभकारी बताया।

हसीन मस्तान ने अपने पूर्व पति के खिलाफ केस की स्थिति के बारे में बताते हुए कहा, "मैंने अपने पूर्व पति के खिलाफ एक मामला दायर किया है। कोर्ट में लड़ने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे। इसी दौरान, वकील आशीष वर्मा से मेरी मुलाकात हुई, जिन्होंने मेरा केस लिया। एक सप्ताह के भीतर ही रिट पिटीशन दाखिल हो गई। मुझे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है कि जल्द ही इंसाफ मिलेगा।"

उन्होंने न्याय की मांग करते हुए कहा, "अब मुझे पूरी उम्मीद है। जैसा कि मैंने कहा, मुझे न्यायपालिका और कानूनी प्रणाली पर बहुत भरोसा है। पहले मेरे पास अपने मामले के लिए सही वकील नहीं थे, लेकिन अब आशीष और अन्य वकील फरिश्तों की तरह आए हैं। अब सरकार भी मदद कर रही है और प्रधानमंत्री को भी इस बारे में जानकारी है।"

मस्तान ने अपने खिलाफ हुए अत्याचारों के बारे में बात करते हुए कहा, "पहले मेरा जबरन बाल विवाह किया गया था और मेरे साथ बलात्कार की कोशिश भी हुई थी। कोई 12 साल की बच्ची से शादी कैसे कर सकता है? जिससे विवाह हुआ था, उसने मुझे मारा, मेरे बच्चे को मार डाला और मुझे इतना मानसिक रूप से परेशान किया कि मैंने आत्महत्या करने की कोशिश की। उसने मुझे बिना कुछ दिए तलाक दे दिया और मेरी पहचान को छिपा दिया। जब मेरी मां जिंदा थीं, तो उन्हें मेरी ओर से बोलने के लिए कोर्ट में आने की इजाजत नहीं थी। मुझे बहुत मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।"

उन्होंने तीन तलाक के समाप्त होने को मुस्लिम समाज के लिए लाभकारी बताते हुए कहा, "यह बहुत फायदेमंद रहा है। देखिए, इस्लाम में 'ट्रिपल तलाक' जैसे मुद्दों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा था। लोग गलत तरीके से तलाक दे रहे थे, जो सच्ची इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार नहीं था। जब पीएम मोदी ने इसका गलत इस्तेमाल देखा, तो उन्होंने इस पर ध्यान दिया। इस मामले को बहुत सावधानी से संभाला गया और इस पर पूरा ध्यान दिया गया। इसी वजह से महिलाओं को राहत मिली है और अब लोग समझते हैं कि तलाक का इस तरह से गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।"

उन्होंने सरकार की तारीफ करते हुए कहा, "अगर मुस्लिम विरोधी भावना होती, तो मैं आज यहां नहीं होती। मैं पीएमओ ऑफिस तक नहीं पहुंच पाती और बिहार के एमपी प्रदीप कुमार सिंह मेरी मदद नहीं करते।"

उन्होंने कहा, "पहले इंसानियत आती है, फिर धर्म। आप हिंदू हैं, मैं मुसलमान हूं इससे क्या फर्क पड़ता है? धर्म बाद में आता है। इंसानियत पहले आती है। हम सब इंसान हैं। अगर किसी को चोट लगती है या कोई तकलीफ में है, तो हमें यह नहीं कहना चाहिए कि 'वे हिंदू हैं' या 'वे मुसलमान हैं।' वे एक इंसान हैं और हमें इंसानियत के नाते ही जवाब देना चाहिए।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन्हें मानसिक और सामाजिक सुरक्षा का भी अहसास कराता है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो समाज में इंसानियत और समानता को बढ़ावा देता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तीन तलाक कानून का क्या महत्व है?
तीन तलाक कानून मुस्लिम महिलाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और उन्हें तलाक के अनुचित उपयोग से बचाता है।
हसीन मस्तान का अनुभव क्या है?
हसीन मस्तान ने अपने खिलाफ हुए अत्याचारों का जिक्र किया और कानून के बदलाव को अपने लिए राहत भरा बताया।
क्या यह कानून सभी मुस्लिम महिलाओं के लिए लाभकारी है?
यह कानून सभी मुस्लिम महिलाओं के लिए सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक है, जो उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा में मदद करता है।
सरकार का इस मामले में क्या योगदान है?
सरकार ने इस कानून को लागू कर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
इस कानून के बाद समाज में क्या बदलाव आए हैं?
इस कानून के लागू होने से समाज में महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी है और तलाक की प्रक्रिया में अनुशासन आया है।
राष्ट्र प्रेस
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