क्या ट्रेन के अंदर प्लेन जैसा सफर संभव है? वंदे भारत स्लीपर में यात्रियों का शानदार अनुभव
Key Takeaways
- वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में आधुनिक सुविधाएँ मौजूद हैं।
- यात्रियों के अनुभव बेहद सकारात्मक रहे हैं।
- सरकार की योजनाएँ आम जनता के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही हैं।
- स्वच्छता की जिम्मेदारी यात्रियों पर भी है।
- इस ट्रेन ने यात्रा के अनुभव को नया आयाम दिया है।
आसनसोल, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की जनता को वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात दी। उन्होंने हावड़ा से गुवाहाटी तक देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
जब ट्रेन आसनसोल पहुंची, तो यात्रियों ने इसे भव्य तरीके से स्वागत किया। यात्रियों ने अपने अनुभव साझा किए।
कुल्टी विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजय पोद्दार ने कहा, "यह सब सोच का मामला है, चुनाव से इसका कोई संबंध नहीं है। 'जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी' के उदाहरण की तरह है। जब जो शुरू होना है, वो हो ही जाता है। यह पहले से तय था और आज देखिए, यह हो गया। इस ट्रेन में यात्रियों को वो सुविधाएँ मिल रही हैं, जो आमतौर पर प्लेन में मिलती हैं।"
सफर कर रहे यात्री सौरभ ने कहा, "इस ट्रेन का अनुभव अद्भुत रहा है, विशेषकर गरीबों के लिए। इतनी सुविधाएँ कम पैसे में मिलना मुश्किल है। ट्रेन में आरामदायक सीटें, चार्जिंग पोर्ट, अच्छी बाथरूम और साफ-सफाई की सुविधाएँ हैं। यह इतना आरामदायक है कि हर किसी को इसे एक बार जरूर अनुभव करना चाहिए।"
एक अन्य महिला यात्री ने कहा, "मेरा अनुभव बहुत ही शानदार रहा है और ट्रेन ने कई सुविधाएँ प्रदान की हैं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ट्रेन की स्वच्छता का ध्यान रखते रहें, क्योंकि प्रशासन के साथ-साथ यात्रियों की जागरूकता भी आवश्यक है। हम उम्मीद करते हैं कि इस रूट पर और ऐसी ट्रेनें चलाई जाएँ।"
एक वरिष्ठ यात्री ने कहा, "सरकार ने ट्रेन शुरू करके बहुत अच्छा काम किया है, क्योंकि इससे आम जनता को सुविधा मिलती है। मैंने यहाँ पहले इतना विकास नहीं देखा था, जितना अब हो रहा है। वरिष्ठ नागरिकों को ऐसी ट्रेनों से बहुत सुविधा मिलती है।"
उन्होंने यात्रा का अनुभव साझा करते हुए कहा कि ट्रेन के अंदर की सुविधा भी बहुत अच्छी है। सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं, बड़ी-बड़ी सीटें हैं और सफाई का स्तर बहुत अच्छा है। सफर के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।