क्या स्वर्ण भस्म बुढ़ापे को दूर भगाने में दवा की तरह काम करती है? जानें सेवन का सही तरीका
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सदियों से विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार के लिए आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग किया जाता रहा है।
इसके अलावा, आयुर्वेद में कई अन्य तरीकों से गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है, जैसे कि भस्म के माध्यम से। आयुर्वेद में लोह भस्म, स्वर्ण भस्म, रजत भस्म और शंख भस्म का उपयोग बीमारियों से राहत पाने के लिए किया जाता रहा है। न केवल भारत में, बल्कि चीन और मिस्र में भी धातु भस्म से उपचार का यह तरीका सदियों से अपनाया जा रहा है। आज हम आपको स्वर्ण भस्म के बारे में जानकारी देंगे।
चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय में स्वर्ण भस्म का उल्लेख किया गया है। इसे सोने के कणों के कई बार शोधन के बाद तैयार किया जाता है और इसकी कीमत भी सोने के समान होती है। सोने की बढ़ती कीमत के साथ भस्म की कीमत में भी वृद्धि होती है। इन ग्रंथों में स्वर्ण भस्म का उपयोग क्षय रोग, एनीमिया, खांसी, दुर्बलता, बांझपन और मांसपेशियों की दुर्बलता के लिए किया गया है। यह त्वचा को युवा बनाए रखने में भी मदद करती है।
स्वर्ण भस्म दिल की बीमारियों से बचाने में सहायक होती है। सोने में क्रोनिक डिसऑर्डर यानी पुरानी गंभीर बीमारियों को ठीक करने के गुण होते हैं, और दिल की कुछ बीमारियां भी इसी श्रेणी में आती हैं। इसलिए अगर आप अपने दिल को जवान रखना चाहते हैं तो स्वर्ण भस्म का सेवन करें।
आयुर्वेद के अनुसार, स्वर्ण भस्म का उपयोग लंबे समय से इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। सोने के कण शरीर की कोशिकाओं को सक्रिय करते हैं और मौसमी संक्रमणों को रोकने में मदद करते हैं। स्वर्ण भस्म का सेवन धीरे-धीरे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से सुरक्षित रखती है।
यदि शरीर में रक्त की कमी होती है और दवाओं के सेवन के बावजूद हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ता है, तो स्वर्ण भस्म का सेवन किया जा सकता है। यह शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने वाली लाल रक्त कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुँचाने में मदद करती है। मानसिक तनाव या उदासी की स्थिति में भी स्वर्ण भस्म का सेवन लाभकारी हो सकता है।
आयुर्वेद में स्वर्ण भस्म को मानसिक रोगों से निपटने के लिए एक बेहतरीन औषधि माना गया है। हालांकि, इसे किसी भी समस्या में चिकित्सक की सलाह से ही लेना चाहिए, क्योंकि इसका सेवन अलग-अलग मात्रा में विभिन्न बीमारियों के अनुसार किया जाता है। गर्भवती महिला और बच्चों को इसके सेवन से पहले चिकित्सक से विशेष सलाह लेनी चाहिए।