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जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर वाहन खाई में गिरा, 2 की मौत और 7 घायल

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जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर वाहन खाई में गिरा, 2 की मौत और 7 घायल

सारांश

जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर गुरुवार देर रात नौ सवारियों से भरा एक वाहन खाई में जा गिरा। चालक विजय सिंह सहित दो लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हुए — जो इस खतरनाक पहाड़ी मार्ग पर बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं की गंभीर तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर 8 अक्टूबर 2026 की देर रात भीषण सड़क हादसा हुआ।
मृतकों की पहचान चालक विजय सिंह और 26 वर्षीय सुनील सिंह के रूप में हुई।
वाहन में कुल 9 लोग सवार थे; 7 घायल हुए।
एक गंभीर घायल को जम्मू रेफर किया गया; 6 को अनंतनाग सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
वाहन चुनथन की ओर जा रहा था जब चालक का नियंत्रण छूट गया और गाड़ी खाई में जा गिरी।

जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 की देर रात एक भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की जान चली गई और सात अन्य घायल हो गए, जब चुनथन की ओर जा रहा एक वाहन अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे जा गिरा। अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की है और राहत कार्य तत्काल शुरू किया गया।

हादसे का विवरण

अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय वाहन में कुल नौ लोग सवार थे और वह चुनथन की दिशा में जा रहा था। इसी दौरान चालक का वाहन पर से नियंत्रण छूट गया और गाड़ी सड़क से फिसलकर नीचे खाई में जा गिरी।

मृतकों की पहचान वाहन के चालक विजय सिंह और 26 वर्षीय सुनील सिंह के रूप में हुई है। दोनों की मौत घटनास्थल पर या इलाज के दौरान हुई।

घायलों का उपचार

हादसे में घायल हुए सात लोगों में से एक की हालत गंभीर होने के कारण उसे जम्मू रेफर किया गया। शेष छह घायलों को अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है।

जम्मू-कश्मीर में सड़क हादसों के कारण

यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में सड़क दुर्घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा स्थानीय यातायात अधिकारियों की रिपोर्टों के अनुसार, इस क्षेत्र में हादसों के प्रमुख कारणों में तेज़ व लापरवाह ड्राइविंग, खतरनाक ओवरटेकिंग, वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियाँ और सीट बेल्ट का कम उपयोग शामिल हैं।

गौरतलब है कि जम्मू-श्रीनगर हाईवे पहाड़ी भूभाग, तीखे मोड़ों और संकरी सड़कों के कारण वैसे भी उच्च-जोखिम वाला मार्ग माना जाता है। ब्लैक स्पॉट, चट्टानें खिसकने की आशंका और मौसमी प्रतिकूलताएँ — जैसे बारिश, बर्फबारी, घनी धुंध और ब्लैक आइस — इन हादसों की गंभीरता को और बढ़ा देती हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

यातायात सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी राजमार्गों पर रात के समय वाहन चलाना विशेष रूप से जोखिमभरा होता है, क्योंकि दृश्यता कम हो जाती है और ब्रेकिंग की क्षमता भी प्रभावित होती है। नशे में ड्राइविंग और वाहनों की अपर्याप्त तकनीकी जाँच भी दुर्घटनाओं में सहायक कारक बताए जाते हैं।

आगे की जाँच स्थानीय पुलिस द्वारा जारी है और अधिकारियों ने इस मार्ग पर वाहन-चालकों से सावधानी बरतने की अपील की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक लंबे और चिंताजनक पैटर्न की कड़ी है — पहाड़ी इलाकों में रात की ड्राइविंग, अनियंत्रित गति और बुनियादी ढाँचे की कमियाँ मिलकर जानलेवा साबित होती हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय के बार-बार के दिशानिर्देशों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर प्रवर्तन कमज़ोर बना हुआ है। जब तक हाईवे पर रात्रि गश्त, तकनीकी वाहन-जाँच और ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्य को प्राथमिकता नहीं दी जाती, ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर हादसा कब और कहाँ हुआ?
यह हादसा 8 अक्टूबर 2026 की देर रात जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर चुनथन के निकट हुआ। वाहन सड़क से फिसलकर खाई में जा गिरा।
हादसे में किसकी मौत हुई और कितने घायल हुए?
हादसे में चालक विजय सिंह और 26 वर्षीय सुनील सिंह की मौत हुई। वाहन में सवार नौ लोगों में से सात घायल हुए।
घायलों को कहाँ भर्ती कराया गया है?
एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को जम्मू रेफर किया गया है। शेष छह घायलों को अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जम्मू-कश्मीर में सड़क हादसों के मुख्य कारण क्या हैं?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य कारणों में तेज़ व लापरवाह ड्राइविंग, खतरनाक ओवरटेकिंग, अत्यधिक भार, सीट बेल्ट का कम उपयोग और खराब मौसम शामिल हैं। पहाड़ी इलाकों की संकरी सड़कें और ब्लैक स्पॉट भी इन हादसों को और गंभीर बना देते हैं।
क्या जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर ऐसे हादसे पहले भी हुए हैं?
हाँ, जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे को देश के सबसे जोखिमभरे राजमार्गों में गिना जाता है। तीखे मोड़, संकरी सड़कें, चट्टानें खिसकने की आशंका और कठिन मौसमी परिस्थितियाँ इस मार्ग पर दुर्घटनाओं को बार-बार दोहराती रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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