10 अगस्त 2026
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यूएई का ओपेक से बाहर निकलना: पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी बोले — तेल कोटा विवाद पाँच साल पुराना

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यूएई का ओपेक से बाहर निकलना: पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी बोले — तेल कोटा विवाद पाँच साल पुराना

सारांश

यूएई का ओपेक छोड़ना महज एक कूटनीतिक कदम नहीं — यह पाँच साल की घुटन का नतीजा है। पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी के अनुसार, 2.7 मिलियन बैरल का कोटा और 5 मिलियन बैरल की बढ़ती क्षमता के बीच की खाई ने यूएई को यह फैसला करने पर मजबूर किया। भारत के लिए यह राहत और अनिश्चितता — दोनों लेकर आया है।

मुख्य बातें

यूएई ने 1 मई से ओपेक से अलग होने की घोषणा की।
पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी के अनुसार यूएई पिछले पाँच वर्षों से यह कदम उठाने पर विचार कर रहा था।
जुलाई 2021 में यूएई को दिया गया कोटा लगभग 2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन था, जिसे बाद में बढ़ाकर 3.4 मिलियन बैरल किया गया।
यूएई की उत्पादन क्षमता अगले वर्ष तक 5 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुँचने का अनुमान है।
तेल की कीमतें वर्तमान में 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं; होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी स्थिति को और जटिल बना रही है।
सूरी के अनुसार एक कमज़ोर ओपेक भविष्य में तेल कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव ला सकता है।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई से ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) से औपचारिक रूप से अलग होने का ऐलान किया है। यूएई और मिस्र में भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी के अनुसार, यह निर्णय अचानक नहीं आया — बल्कि यूएई पिछले पाँच वर्षों से सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस कार्टेल को छोड़ने पर विचार कर रहा था, क्योंकि उसे दिया गया तेल उत्पादन कोटा उसकी वास्तविक क्षमता से काफी कम था।

कोटा विवाद की जड़ें

राष्ट्र प्रेस के साथ एक विशेष साक्षात्कार में पूर्व राजदूत सूरी ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक विखंडित ओपेक दीर्घकाल में ऊर्जा बाज़ार को अस्थिर बना सकता है, जो ऊर्जा-आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कहीं अधिक चिंताजनक है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएई ने ओपेक क्यों छोड़ा?
यूएई को ओपेक द्वारा दिया गया तेल उत्पादन कोटा उसकी वास्तविक क्षमता से काफी कम था। पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी के अनुसार, यूएई जुलाई 2021 से ही इस कोटे से असंतुष्ट था और पिछले पाँच वर्षों से ओपेक छोड़ने पर विचार कर रहा था।
यूएई की तेल उत्पादन क्षमता कितनी है?
पूर्व राजदूत सूरी के अनुसार, यूएई ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी उत्पादन क्षमता में भारी निवेश किया है और अगले वर्ष तक लगभग 5 मिलियन बैरल प्रति दिन उत्पादन करने की क्षमता हासिल कर सकता है, जबकि उसे ओपेक में केवल 3.4 मिलियन बैरल का कोटा मिला था।
यूएई के ओपेक छोड़ने से भारत पर क्या असर होगा?
पूर्व राजदूत सूरी के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने के बाद यूएई के अतिरिक्त उत्पादन से तेल की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, जिससे भारत को फायदा होगा। हालाँकि, एक कमज़ोर ओपेक तेल की कीमतों में दीर्घकालिक अस्थिरता भी बढ़ा सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी का तेल बाज़ार पर क्या प्रभाव है?
वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के कारण तेल की कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गई हैं। पूर्व राजदूत सूरी ने कहा कि यूएई के ओपेक से बाहर निकलने के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन स्ट्रेट के फिर से खुलने और सामान्य तेल प्रवाह की बहाली पर निर्भर करेगा।
ईरान-अमेरिका संघर्ष पर भारत का क्या रुख है?
पूर्व राजदूत सूरी ने कहा कि भारत इन घटनाक्रमों को लेकर 'बहुत परेशान' है क्योंकि इनका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने ईरान के पड़ोसी देशों पर हमले, होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी और अमेरिकी नाकाबंदी — तीनों को गैर-कानूनी बताया।
राष्ट्र प्रेस
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