यूपी के उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘नारी शक्ति वंदन’ अभियान, दीवार और पदयात्रा से जागरूकता का संचार
सारांश
Key Takeaways
- महिला सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कदम।
- अभियान का उद्देश्य जनभागीदारी को बढ़ावा देना।
- पदयात्राएं और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन।
- महिला महाविद्यालयों में नारी शक्ति दीवार की स्थापना।
- सोशल मीडिया के माध्यम से जनसमर्थन जुटाना।
लखनऊ, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को एक जनांदोलन के रूप में विकसित करने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ का प्रचार-प्रसार तेजी से किया जा रहा है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने एक वर्चुअल बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस अभियान की गतिविधियों को विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रभावी और व्यापक रूप से लागू किया जाए।
इस महत्वपूर्ण बैठक में मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार का यह प्राथमिक उद्देश्य है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को समन्वय और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपते हुए अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया। मंत्री ने बताया कि 10 से 20 अप्रैल 2026 तक चलने वाले इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और आम जन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
निर्देशों के अनुसार 15 और 16 अप्रैल को प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में ‘नारी शक्ति पदयात्रा’ का आयोजन किया जाएगा। इन पदयात्राओं का नेतृत्व सामाजिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित महिलाओं द्वारा किया जाएगा, जबकि ‘लखपति दीदी’ जैसी लाभार्थियों, एनसीसी और एनएसएस स्वयंसेवकों को भी शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही स्कूटी यात्राओं के माध्यम से भी इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। उच्च शिक्षा मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि महिला महाविद्यालयों और छात्रावासों सहित प्रमुख स्थानों पर ‘नारी शक्ति दीवार’ स्थापित की जाए।
यहां महिलाएं अपने विचार साझा करेंगी और हस्ताक्षर कर महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी भागीदारी दर्ज कराएंगी। इसके अतिरिक्त, मानव श्रृंखला बनाकर जागरूकता का संदेश दिया जाएगा। अभियान को व्यापक बनाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा, और जनसमर्थन जुटाने के लिए मिस्ड कॉल नंबर और स्टिकर का उपयोग किया जाएगा। सैंड आर्ट, नुक्कड़ नाटक, चित्रकला, लोकगीत और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए भी समाज में संदेश पहुंचाया जाएगा।
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए जिम्मेदारियों का निर्धारण भी किया गया है। उच्च शिक्षा परिषद के सचिव निजी विश्वविद्यालयों से समन्वय करेंगे, कुलसचिव सरकारी एवं अनुदानित महाविद्यालयों से संपर्क बनाएंगे, परीक्षा नियंत्रक स्ववित्तपोषित संस्थानों के साथ तालमेल करेंगे, जबकि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यक्रमों की निगरानी करेंगे। विशेष सचिव राजकीय विश्वविद्यालयों में गतिविधियों की देखरेख करेंगे।