उत्तर प्रदेश: अभ्युदय और भागीदारी कोचिंग से मिली सफलता, यूपीएससी-2025 में छह अभ्यर्थियों का चयन
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश की निःशुल्क कोचिंग पहल ने एक बार फिर अद्भुत परिणाम प्रदर्शित किए हैं। समाज कल्याण मंत्रालय के अधीन गोमती नगर में स्थित भागीदारी भवन में चलने वाली आवासीय कोचिंग और मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से संबंधित छह अभ्यर्थियों का चयन सिविल सेवा परीक्षा (यूपीएससी)-2025 में हुआ है।
इन अभ्यर्थियों में से दो ने भागीदारी भवन की आवासीय कोचिंग से प्रशिक्षण प्राप्त किया, जबकि चार ने यहां आयोजित मॉक इंटरव्यू में भाग लिया। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने इस उपलब्धि पर सभी चयनित अभ्यर्थियों को बधाई दी और कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता यह है कि प्रदेश के हर मेधावी और प्रतिभावान युवा को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उच्च गुणवत्ता का मार्गदर्शन और संसाधन प्रदान किए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार भविष्य में इन सुविधाओं को और बेहतर बनाएगी, ताकि अधिक से अधिक युवा सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकें। समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने जानकारी दी कि भागीदारी भवन की आवासीय कोचिंग से प्राप्त प्रशिक्षण में विमल कुमार ने 107वीं और विपिन देव यादव ने 316वीं रैंक हासिल की है।
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत आयोजित मॉक इंटरव्यू में शामिल अभ्यर्थियों में मानसी को 444वीं, महेश जायसवाल को 590वीं, अदिति सिंह को 859वीं और तनीषा सिंह को 930वीं रैंक प्राप्त हुई है।
समाज कल्याण मंत्रालय के द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भागीदारी भवन में आवासीय कोचिंग की व्यवस्था की गई है। यहाँ सिविल सेवा मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिसमें विषय विशेषज्ञ और वरिष्ठ आईएएस और पीसीएस अधिकारी अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
इसके साथ ही, चयनित विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास, भोजन, पुस्तकालय, अध्ययन सामग्री और ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कक्षाओं की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
सरकार का मानना है कि इस तरह की योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं को सिविल सेवा जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्रों में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही हैं। इस उपलब्धि को प्रदेश में प्रतिभा संवर्धन और समान अवसर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।