क्या यूपी में आधुनिक खेती गांव-गांव तक पहुंचेगी? 26 हजार कृषि आजीविका सखियां खेती के तरीके बदल रही हैं
सारांश
Key Takeaways
- 26373 कृषि आजीविका सखियां आधुनिक खेती की जानकारी फैलाने में जुटी हैं।
- किसान पारंपरिक खेती से वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
- महिला सशक्तिकरण और कृषि सुधार का संगम हो रहा है।
- खेती की लागत कम और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।
- आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
लखनऊ, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में खेती की स्थिति तेजी से बदलने वाली है। 26373 कृषि आजीविका सखियां योगी सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए तैनात की गई हैं, जो अब प्रदेश के गांव-गांव में आधुनिक खेती का संदेश फैला रही हैं। महिला सशक्तिकरण और कृषि सुधार को एक साथ आगे बढ़ाने वाला यह अभियान प्रदेश को आत्मनिर्भर कृषि मॉडल की दिशा में ले जा रहा है।
प्रदेश के 75 जिलों के 826 विकास खंडों में काम कर रहीं ये कृषि आजीविका सखियां किसानों को पारंपरिक खेती से दूर कर वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही, मिट्टी की जांच, जैविक खाद निर्माण, प्राकृतिक कीट नियंत्रण, उन्नत बीज चयन जैसी तकनीकों के माध्यम से खेती की लागत को कम करके उत्पादन बढ़ाने के उपाय बताई जा रही हैं।
ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों में फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मुर्गी पालन और बकरी पालन जैसे आजीविका विकल्पों को भी मजबूत किया जा रहा है। इससे आय के स्रोत बढ़ते जा रहे हैं और किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि कृषि आजीविका सखियां खेतों में बदलाव की असली ताकत बन चुकी हैं। ये महिलाएं किसानों को तकनीकी जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें सरकारी योजनाओं से भी जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
योगी सरकार की मंशा स्पष्ट है। खेती को लाभ का माध्यम बनाना और ग्रामीण महिलाओं को विकास की धुरी बनाना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता है। योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब महिला शक्ति, आधुनिक खेती और आत्मनिर्भर गांवों का मॉडल बनता जा रहा है। इसके अंतर्गत ही किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि आजीविका सखियां पूरे प्रदेश में प्राकृतिक खेती के प्रचार के लिए जागरूकता सत्र भी आयोजित कर रही हैं।