क्या यूपी में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट एसआईआर 2026 को लेकर फैले भ्रम के बारे में चुनाव आयोग ने नाम जांचने की प्रक्रिया बताई?
सारांश
Key Takeaways
- ड्राफ्ट वोटर लिस्ट एसआईआर 2026 में नाम जांचने के लिए दो तरीके हैं।
- सीईओ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नाम की स्थिति देखी जा सकती है।
- किसी भी समस्या के लिए फॉर्म-6 भरा जा सकता है।
- मतदाताओं को अपनी पहचान की चिंता में सतर्क रहना चाहिए।
- नाम की स्थिति फाइनल वोटर लिस्ट में महत्वपूर्ण है।
लखनऊ, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में एसआईआर 2026 के तहत प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर मतदाताओं में प्रश्न और चिंताएं उत्पन्न हो रही हैं। इस संदर्भ में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) उत्तर प्रदेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से वोटर लिस्ट में नाम जांचने की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया है।
सीईओ यूपी ने एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किया कि यदि कोई व्यक्ति जानना चाहता है कि उसका नाम 6 जनवरी 2026 को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में है या नहीं, तो इसके लिए दो सरल तरीके हैं।
पहला तरीका है सीईओ यूपी की आधिकारिक वेबसाइट। यहां मतदाताओं को आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर 'एसआईआर 2026' का एक पॉप-अप विंडो दिखाई देगा। इस विंडो में 'ड्राफ्ट मतदाता सूची एसआईआर 2026 में ईपिक नंबर से अपना नाम खोजें' पर क्लिक करना होगा। इसके बाद, ईपिक नंबर डालकर कैप्चा भरा जाएगा और सर्च बटन पर क्लिक करना होगा। यदि नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में है, तो जिले, विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र और वोटर लिस्ट में क्रम संख्या की जानकारी मिलेगी। यदि नाम नहीं है, तो स्क्रीन पर 'नो रिजल्ट फाउंड' दिखाई देगा।
दूसरा तरीका है चुनाव आयोग की वेबसाइट। यहां भी ईपिक नंबर और कैप्चा भरकर सर्च करने से ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
सीईओ यूपी ने एक अन्य 'एक्स' पोस्ट में यह भी बताया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम नई स्थान की वोटर लिस्ट में नहीं है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि उसका नाम दोनों जगहों से काट दिया गया है। यदि कोई मतदाता नए पते पर स्थानांतरित हुआ है, तो वह अपने नए पते के आधार पर फॉर्म-6 भर सकता है। सीईओ के अनुसार, एसआईआर का केवल प्रारंभिक चरण पूरा हुआ है और असली परिणाम फाइनल वोटर लिस्ट होगी। ड्राफ्ट लिस्ट में नाम का होना या न होना इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि नाम फाइनल वोटर लिस्ट में हो।
कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने इस मुद्दे पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे जनहित का मामला बताते हुए कहा कि वोटर लिस्ट से नाम कटने की समस्या केवल उनकी नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के लगभग 2.17 करोड़ नागरिक इससे प्रभावित हो सकते हैं।
गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि यदि पुराने पते से नाम काटकर नए पते पर जोड़ा जाता, तो कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन समस्या यह है कि कई मामलों में नाम दोनों जगहों से हटा दिया गया है। उनका दावा था कि एसआईआर प्रक्रिया में नए पते पर नाम शिफ्ट करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
उन्होंने चुनाव आयोग से सवाल किया कि जब यह मामला लगभग 15 प्रतिशत वोटरों से संबंधित है, तो इसे ईपिक नंबर से जोड़कर आसान क्यों नहीं बनाया गया। पहले फॉर्म-8 के जरिए वोटर आसानी से अपना पता बदल सकते थे, फिर एसआईआर में यह व्यवस्था क्यों नहीं रखी गई और सीधे नाम हटाने का मार्ग क्यों अपनाया गया।