क्या उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने चेन्नई में 9वें सिद्ध दिवस का उद्घाटन किया और इसे जीवित स्वास्थ्य परंपरा बताया?

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क्या उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने चेन्नई में 9वें सिद्ध दिवस का उद्घाटन किया और इसे जीवित स्वास्थ्य परंपरा बताया?

सारांश

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 9वें सिद्ध दिवस का उद्घाटन किया, जिसमें उन्होंने सिद्ध चिकित्सा को एक समग्र स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में प्रस्तुत किया। इस समारोह में सिद्ध चिकित्सा के महत्व और इसकी वैज्ञानिक गहराई पर चर्चा की गई।

Key Takeaways

  • सिद्ध चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
  • उपराष्ट्रपति ने सिद्ध की दार्शनिक नींव और वैज्ञानिक गहराई पर जोर दिया।
  • पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा का एकीकरण आवश्यक है।
  • युवाओं को सिद्ध में अनुसंधान के लिए प्रेरित किया गया।
  • समारोह में कई प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया गया।

चेन्नई, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को चेन्नई के कलाईवनार आरंगम में 9वें सिद्ध दिवस समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने सिद्ध चिकित्सा को आधुनिक युग की एक समग्र, निवारक और सतत स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में प्रस्तुत किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा, "सिद्ध, आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष प्रणालियां अतीत की विरासत नहीं हैं, बल्कि जीवित परंपराएं हैं जो भारत और विश्व में लाखों लोगों के स्वास्थ्य में योगदान कर रही हैं।"

उन्होंने सिद्ध की मजबूत दार्शनिक नींव, वैज्ञानिक गहराई और शरीर, मन और प्रकृति के बीच सामंजस्य पर जोर दिया। सिद्ध चिकित्सा को हजारों वर्षों के ज्ञान पर आधारित बताते हुए उन्होंने इसके निवारक स्वास्थ्य, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों के मूल कारणों पर ध्यान देने की सराहना की।

उन्होंने प्राचीन ताड़पत्रों की पांडुलिपियों, शास्त्रीय ग्रंथों और औषधीय जड़ी-बूटियों की प्रदर्शनी की प्रशंसा की और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और अनुसंधान पर निरंतर प्रयासों की आवश्यकता बताई। उपराष्ट्रपति ने युवा विद्वानों को आह्वान किया कि वे सिद्ध में वैज्ञानिक अनुसंधान बढ़ाकर लाइलाज रोगों के इलाज में योगदान दें। उन्होंने आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा के एकीकरण पर जोर देते हुए कहा कि सिद्ध दिवस प्राचीन ज्ञान और वैज्ञानिक प्रगति को मिलाकर एक स्वस्थ समाज बनाने की प्रेरणा देता है।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि सिद्ध का समग्र दृष्टिकोण शरीर, मन और प्रकृति को एकीकृत करता है, जो आधुनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुकूल है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से आयुष मंत्रालय की स्थापना के बाद सिद्ध शिक्षा, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे में हुई प्रगति का उल्लेख किया।

उन्होंने डब्ल्यूएचओ आईसीडी-11 में सिद्ध रुग्णता संहिता के शामिल होने और आगामी अंतरराष्ट्रीय मानक शब्दावली का जिक्र करते हुए सिद्ध को वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर मजबूत स्थापित होने की बात कही।

इस वर्ष का विषय 'सिद्ध फॉर ग्लोबल हेल्थ' है, जो ऋषि अगस्त्य (सिद्ध चिकित्सा के जनक) की जयंती पर आधारित है। समारोह में सिद्ध चिकित्सा में असाधारण योगदान के लिए पांच प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया गया, जिनमें डॉ. बी. माइकल जयराज, डॉ. टी. कन्नन राजाराम, स्वर्गीय डॉ. आई. सोर्नामरिअम्मल, डॉ. मोहना राज और प्रो. डॉ. वी. बानुमति शामिल हैं। इनकी आजीवन सेवा, अनुसंधान, पांडुलिपि संरक्षण और नेतृत्व ने सिद्ध को मजबूत बनाया।

समारोह में तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मा. सुब्रमण्यन, आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान (एनआईएस), केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (सीसीआरएस) के प्रतिनिधि, चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

Point of View

बल्कि आधुनिक चिकित्सा के साथ इसके समन्वय की आवश्यकता को भी उजागर करता है। उपराष्ट्रपति और अन्य नेताओं के विचार इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं कि कैसे पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ मिलाकर एक स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है।
NationPress
24/02/2026

Frequently Asked Questions

सिद्ध चिकित्सा क्या है?
सिद्ध चिकित्सा एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली है जो शरीर, मन और प्रकृति के बीच सामंजस्य पर आधारित है।
सिद्ध दिवस का महत्व क्या है?
सिद्ध दिवस का महत्व सिद्ध चिकित्सा के संरक्षण और संवर्धन के लिए जागरूकता फैलाने में है।
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