क्या वेनेजुएला में अमेरिकी हमले के खिलाफ सीपीआई ने भारत सरकार से अपील की?

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क्या वेनेजुएला में अमेरिकी हमले के खिलाफ सीपीआई ने भारत सरकार से अपील की?

सारांश

वेनेजुएला में अमेरिका के हमले की निंदा के बीच, सीपीआई ने भारत सरकार से अपील की है कि वह अमेरिका के खिलाफ आवाज उठाए। यह मामला न केवल वेनेजुएला के लिए, बल्कि विकासशील देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है। जानिए इस विवाद के पीछे की सच्चाई और भारत की भूमिका।

Key Takeaways

  • वेनेजुएला पर अमेरिका का हमला अंतर्राष्ट्रीय विवाद का विषय बन गया है।
  • सीपीआई ने भारत सरकार से स्पष्ट निंदा की मांग की है।
  • साम्राज्यवाद और सैन्यवाद के खिलाफ एकजुटता की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वेनेजुएला में अमेरिका के हमले की विश्वभर में आलोचना हो रही है। अमेरिकी बलों ने न केवल वेनेजुएला पर आक्रमण किया, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार करके न्यूयॉर्क ले गए। भारत ने इस मामले में दोनों पक्षों के बीच संवाद के माध्यम से विवाद को सुलझाने का आग्रह किया है। इसी बीच, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने भारत सरकार से अमेरिका के खिलाफ आवाज उठाने की मांग की है।

सीपीआई के राष्ट्रीय सचिवालय ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, "सीपीआई वेनेजुएला के लोगों और वहां की वैध सरकार के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करती है और दुनिया की प्रगतिशील शक्तियों से साम्राज्यवाद, सैन्यवाद और नव-औपनिवेशिक हमले के खिलाफ एकजुट होने की अपील करती है। साम्राज्यवाद को अंतर्राष्ट्रीय कानून और देश की स्वतंत्रता को रौंदने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।"

अमेरिका के कार्यों को आतंकवाद के रूप में वर्णित करते हुए सीपीआई ने कहा, "किसी विदेशी शक्ति द्वारा वर्तमान राष्ट्रपति का अपहरण करना सरकारी आतंकवाद के समान है। यह सभी विकासशील देशों की संप्रभुता के लिए खतरा है। यदि ऐसे कार्य सामान्य हो जाते हैं, तो ग्लोबल साउथ का कोई भी देश साम्राज्यवादी दबाव, शासन परिवर्तन के प्रयास और सैन्य धमकी से सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता।"

सीपीआई ने मांग की है कि भारत सरकार तुरंत अपने अनिश्चित और साम्राज्यवाद समर्थित दृष्टिकोण को छोड़ दे और अमेरिका के हमले की स्पष्ट निंदा करे। भारत को अंतर्राष्ट्रीय कानून, राष्ट्रीय संप्रभुता और लोगों के बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपने राजनीतिक और आर्थिक ढांचे को तय करने के अधिकार की रक्षा में अपनी आवाज उठानी चाहिए।

पार्टी ने आगे कहा कि भारत को गुटनिरपेक्ष देशों, लैटिन अमेरिका, ग्लोबल साउथ और साम्राज्यवादी दखल के खिलाफ खड़े सभी देशों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। ऐसे खुलेआम गैर-कानूनी कार्यों के सामने चुप रहना सहयोग के बराबर है।

पार्टी ने अपने बयान में कहा, "भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत सरकार के इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी गहरी चिंता और गुस्सा व्यक्त करती है, जिसने चुप रहना चुना है और वास्तव में, इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर खुद को अमेरिकी साम्राज्यवाद के साथ जोड़ा है। ऐसा रवैया भारत के गुटनिरपेक्षता, साम्राज्यवाद-विरोधी, उपनिवेशवाद-विरोधी और ग्लोबल साउथ के दबे-कुचले देशों के साथ एकजुटता के ऐतिहासिक वादे से एक शर्मनाक बदलाव दर्शाता है।"

Point of View

यह आवश्यक है कि हम अपने देश के प्रति जिम्मेदार रहें और अंतर्राष्ट्रीय मामलों में अपनी स्थिति को स्पष्ट करें। भारत को बिना किसी संकोच के अपने नेतृत्व का प्रदर्शन करना चाहिए और वैश्विक मंच पर साम्राज्यवाद के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

वेनेजुएला में अमेरिका के हमले का कारण क्या है?
अमेरिका ने वेनेजुएला की सरकार को अस्थिर करने के लिए सैन्य हस्तक्षेप किया है, जिससे वहाँ की राजनीतिक स्थिति और बिगड़ गई है।
सीपीआई ने भारत सरकार से क्या अपील की है?
सीपीआई ने भारत सरकार से अमेरिका के खिलाफ स्पष्ट रूप से आवाज उठाने और वेनेजुएला के समर्थन में खड़े होने की अपील की है।
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