क्या वोटर लिस्ट सुधारने के लिए एसआईआर प्रक्रिया अनिवार्य है? कांग्रेस की कोशिशें बेकार: मंत्री दिलीप जायसवाल
सारांश
Key Takeaways
- एसआईआर प्रक्रिया वोटर लिस्ट को सही करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- कांग्रेस ने इस प्रक्रिया को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाई है।
- मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया कानूनी है।
- इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल चुनावों की पारदर्शिता है।
- कांग्रेस के आंतरिक विवाद जारी हैं।
पटना, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने एसआईआर प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उनका कहना है कि एसआईआर वोटर लिस्ट को सही करने की प्रक्रिया है, लेकिन कांग्रेस लगातार इस पर भ्रामक जानकारी फैलाने का प्रयास कर रही है।
दिलीप जायसवाल ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत सबसे पहले बिहार से हुई, जहां राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जैसे प्रमुख नेताओं ने भ्रम फैलाने के लिए यात्राएं कीं। यहां तक कि चुनाव आयोग को बदनाम करने की भी कोशिशें की गईं। इसके बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में भी अपना पक्ष रखा।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि एसआईआर का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को शुद्ध करना है, जिसमें मृत व्यक्तियों के नाम हटाना, डुप्लीकेट एंट्री को साफ करना, विदेशी वोटरों के नाम हटाना और उन लोगों को हटाना शामिल है जो वर्षों से अपने रजिस्टर्ड पते पर नहीं रहते। इसके साथ ही, भारत में वोटर के तौर पर दर्ज घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी योजना है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी है और इसका उद्देश्य केवल चुनावों को पारदर्शी बनाना है।
मंत्री ने कांग्रेस पर भी जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की रैलियों में बार-बार अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, यहां तक कि प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ भी अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। उनका कहना है कि जब राहुल गांधी विदेश में होते हैं, तो प्रियंका गांधी को अलग नेता के रूप में पेश करने का प्रयास किया जाता है। दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह अंदरूनी विवाद कांग्रेस के भीतर जारी रहेगा और उनका मानना है कि आने वाले समय में कांग्रेस समाप्त हो जाएगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया केवल चुनाव को निष्पक्ष बनाने और फर्जी वोटिंग से रोकने के लिए है, न कि किसी पार्टी या नेता के खिलाफ। उनका कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है, जबकि यह सच है कि एसआईआर के तहत उठाए जाने वाले कदम सभी कानून के दायरे में हैं।