क्या भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, पीएम मोदी की वैश्विक पहचान मजबूत है?
सारांश
Key Takeaways
- भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
- प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है।
- 'विकसित भारत जी राम जी योजना' पर विपक्ष ने आपत्ति जताई है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
भागलपुर, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने भारत की आर्थिक प्रगति, केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक भूमिका पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल भारत के ही नहीं, बल्कि समस्त विश्व के एक प्रभावशाली नेता बन चुके हैं, जिनकी आवाज हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजती है।
भारत के जीडीपी विकास पर चर्चा करते हुए शाहनवाज हुसैन ने कहा कि भारत एक तेजी से उभरता हुआ देश है। इस देश के पास आज मजबूत सैन्य शक्ति के साथ-साथ एक सशक्त आर्थिक क्षमता भी है। यही कारण है कि भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है।
इस मौके पर शाहनवाज हुसैन ने 'विकसित भारत जी राम जी योजना' को लेकर विपक्ष पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस योजना में कई सकारात्मक और जनहित से जुड़े प्रावधान हैं। खासकर, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण पहल इस योजना का हिस्सा हैं। इसके बावजूद, उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को इस योजना पर आपत्ति सिर्फ इसलिए है क्योंकि इसके नाम में 'राम' शब्द शामिल है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि विकास से संबंधित मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष हर अच्छे कदम का विरोध करने का तरीका खोज लेता है। यह योजना गांवों के विकास और रोजगार में नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसी बीच, शाहनवाज हुसैन ने प्रधानमंत्री मोदी के एक 'एक्स' पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किया, जिसमें सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उल्लेख किया गया है।
पीएम मोदी ने 'एक्स' पोस्ट में कहा कि यह अवसर भारत माता के उन अनगिनत सपूतों को याद करने का पर्व है, जिन्होंने अपने सिद्धांतों और मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया। चाहे समय कितना भी कठिन क्यों न रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा है।
प्रधानमंत्री ने 'एक्स' पोस्ट के जरिए यह भी कहा कि हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा अटूट रही। एक हजार वर्षों की अटूट आस्था का यह अवसर देश की एकता के लिए लगातार प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।