क्या विधानसभाओं में एआई के बेहतर उपयोग के लिए सटीकता आवश्यक है?: हरिवंश

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क्या विधानसभाओं में एआई के बेहतर उपयोग के लिए सटीकता आवश्यक है?: हरिवंश

सारांश

हरिवंश ने विधानसभाओं में एआई की भूमिका पर जोर दिया है। क्या यह सटीकता और विश्वसनीयता के बिना संभव है? जानिए कैसे एआई से संवैधानिक संस्थाओं को ज्ञान का केंद्र बनाया जा सकता है।

Key Takeaways

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सटीक उपयोग विधानसभाओं को सक्षम बना सकता है।
  • एआई द्वारा नीतिगत सूचनाओं का समन्वय किया जा सकता है।
  • एक 'डेटा लेक' की आवश्यकता है।
  • संसदीय ज्ञान अद्वितीय है और इसे सहेजना आवश्यक है।
  • एआई-आधारित सेवाएं विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराई जा रही हैं।

लखनऊ, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (एआईपीओसी) के पूर्ण सत्र को संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों के पीठासीन अधिकारियों को संबोधित करते हुए विधानसभाओं को अधिक सक्षम बनाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर जोर दिया और साथ ही इस तकनीक को सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए उठाए जाने वाले विभिन्न आवश्यक कदमों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने संसद में एआई के उपयोग के विभिन्न व्यावहारिक उदाहरणों और तरीकों को प्रस्तुत करने के साथ-साथ राज्य विधानसभाओं और संसद के बीच अधिक तालमेल का आह्वान किया। इससे यह सुनिश्चित होगा कि विधानसभाओं के संस्थागत ज्ञान का प्रभावी ढंग से उपयोग संसद और राज्य विधानसभाओं दोनों के लिए किया जा सके।

हरिवंश ने नीतिगत सूचनाओं के सामंजस्यपूर्ण समन्वय और सुलभता के दृष्टिकोण पर बल देते हुए कहा, "विधानमंडल उन सभी आधिकारिक नीतिगत दस्तावेजों के संरक्षक होते हैं, जिनमें कानून, बजट आदि पर विभिन्न बहसें शामिल हैं। ये दस्तावेज सदन में पेश किए जाने पर सदन का हिस्सा बन जाते हैं। यह जानकारी अक्सर विभिन्न मंत्रालयों में बिखरी रहती है। संसद और राज्य विधानसभाएं एआई का उपयोग करके ऐसे मंच का निर्माण कर सकती हैं, जिससे ये सभी के लिए आसानी से सुलभ हो सकें। इससे इन संवैधानिक संस्थाओं को ज्ञान के केंद्र के रूप में निर्मित करने को बढ़ावा मिलेगा।"

उन्होंने एक 'डेटा लेक' की आवश्यकता पर भी बल दिया जिसमें विधायी बहसों की अनूठी भाषा, शब्दावली और देश भर के दस्तावेजों का उपयोग भारतीय संदर्भ के लिए सबसे उपयुक्त तकनीक को प्रशिक्षित करने के लिए किया जा सके। हरिवंश ने एक हाइब्रिड तंत्र बनाने का आह्वान किया जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रशिक्षण और उससे प्राप्त होने वाले परिणामों पर मानव की निगरानी रहे।

उन्होंने इस पर जोर देते हुए कहा, "संसदीय उपयोग के लिए एआई की उपयुक्तता केवल उसकी एल्गोरिथम क्षमता के कारण नहीं है। यह वह ज्ञान है जिस पर इस तकनीक को प्रशिक्षित किया जाता है। इसलिए संसदीय एआई को संसद के भीतर ही प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और उसे सावधानीपूर्वक संकलित संसदीय आंकड़ों से पोषित किया जाना चाहिए। कौशल अर्जित किए जा सकते हैं, स्थानांतरित किए जा सकते हैं या बाहरी स्रोतों से प्राप्त किए जा सकते हैं। लेकिन, ज्ञान संदर्भ से जुड़ा होता है और संस्था में गहराई से समाहित होता है। संसदीय ज्ञान अद्वितीय है। यह दशकों से बहसों, निर्णयों, परंपराओं और संवैधानिक कामकाज के तौर-तरीकों के माध्यम से निर्मित होता है।"

उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि संसद में विभिन्न भाषाओं में सेवाएं प्रदान करने के लिए एआई-आधारित ट्रांसक्रिप्शन और एक ही समय में एक साथ अनुवाद का परीक्षण किया जा रहा है। अभी सांसद सदन की कार्यवाही और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों को अपनी पसंद की भाषा में देख सकते हैं। यह सुविधा एआई की मदद से उपलब्ध कराई गई है।

इसके अतिरिक्त उपसभापति ने यह भी बताया कि प्रश्नकाल के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों की स्वीकार्यता की जांच, पिछले उदाहरणों और निर्णयों की खोज जैसे नियमित प्रशासनिक कार्य भी एआई की मदद से किए जा सकते हैं। उन्होंने कर्मचारियों और विधायकों के लिए अधिक जागरूकता और प्रशिक्षण सत्र शुरू करने का भी आह्वान किया ताकि वे अपनी-अपनी भूमिकाओं को कुशलतापूर्वक निभा सकें।

Point of View

जो न केवल संसदीय कार्यों को सुगम बनाएगा, बल्कि लोकतंत्र को भी मजबूत करेगा।
NationPress
20/01/2026

Frequently Asked Questions

हरिवंश ने कौन सा सम्मेलन संबोधित किया?
हरिवंश ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (एआईपीओसी) को संबोधित किया।
क्या एआई विधानसभाओं में उपयोग किया जा सकता है?
हाँ, हरिवंश ने विधानसभाओं में एआई के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
हरिवंश ने एआई की सटीकता पर क्या कहा?
उन्होंने एआई की सटीकता और विश्वसनीयता के लिए जरूरी कदमों का उल्लेख किया।
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